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Kartik Purnima 2024 Date: कार्तिक पूर्णिमा कब है 14 या 15 नवंबर? यहां जानें स्नान-दान का मुहूर्त और पूजा विधि

Fri, 08 Nov 2024 01:02 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Kartik Purnima 2024: कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान और दीप दान करने का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में नदी में स्नान करने से व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
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कार्तिक पूर्णिमा 2024 - फोटो : amar ujala
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Kartik Purnima 2024 Date And Time: कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान और दीप दान करने का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में नदी में स्नान करने से व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही इस शुभ दिन पर जरूरतमंदों को दान करना भी शुभ माना जाता है। आइए आपको बताते हैं कि इस साल कार्तिक पूर्णिमा कब है और स्नान-दान का शुभ समय कब है।

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कार्तिक पूर्णिमा कब है 2024
कार्तिक पूर्णिमा- 15 नवंबर 2024, शुक्रवार
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ- 15 नवम्बर 2024, शुक्रवार प्रातः 06:19 
पूर्णिमा तिथि समाप्त - 16 नवम्बर 2024, शनिवार देर रात 02:58

कार्तिक पूर्णिमा 2024 गंगा स्नान मुहूर्त
प्रात: काल 04:58 से लेकर प्रातःकाल 05:51 तक

कार्तिक पूर्णिमा 2024 चंद्रोदय समय
पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय समय सायं 4:51 तक।

देव दिवाली 2024 मुहूर्त
देव दीपावली पूजा मुहूर्त 15नवंबर को सायं 05:10 से लेकर रात 07:47 तक ।

कार्तिक पूर्णिमा लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2024
कार्तिक पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजन मुहूर्त 15 नवंबर को रात 11:39 से लेकर देर रात 12:33 बजे तक। 

कार्तिक पूर्णिमा चौघड़िया मुहूर्त 2024
चर - सामान्य- प्रातः 06:44 से प्रातः 08:04 
लाभ - उन्नति - प्रातः 08:04 से  प्रातः 09:25
शुभ - उत्तम - दोपहर 12:06 से दोपहर 01:26
चर - सामान्य - सायं 04:07 से सायं 05:27 
लाभ - उन्नति - सायं 08:47 से  सायं 10:26 
शुभ - उत्तम - देर रात 12:06 से देर रात 01:46 (16 नवंबर

कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि 
कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान और दीपदान का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन सही समय पर नदी में स्नान करने से व्यक्ति पापों से मुक्त हो जाता है। इसके अलावा, इस शुभ दिन पर जरूरतमंदों को दान भी दिया जाता है। आइए बताते हैं कार्तिक पूर्णिमा की पूजा विधि।

  • कार्तिक पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठें।
  • घर की साफ-सफाई करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • व्रत  का संकल्प लें। 
  • भगवान विष्णु को सुगंध, फूल, फल, पुष्प और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं।
  • देसी गाय का दीपक जलाएं, आरती करें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
  • फल, मिठाई आदि का भोग लगाएं। 
  • इसके बाद कथा करें। 
  • गरीब लोगों को दान देना एक अच्छा शगुन माना जाता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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