कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करते श्रद्धालु
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कार्तिक पूर्णिमा का मुहूर्त 2020
पूर्णिमा तिथि शुरू: 29 नवंबर, रविवार को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 30 नवंबर, सोमवार को दोपहर 03 बजे तक।
गंगा स्नान - 30 नवंबर
हरिद्वार में कार्तिक पूर्णिमा स्नान
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कार्तिक पूर्णिमा क्या करें
कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है। स्नान के बाद राधा-कृष्ण का पूजन और दीपदान करना चाहिए। इस दिन गौ, घी और दीप दान करने से आर्थिक संपत्ति बढ़ती है। कार्तिक पूर्णिमा का व्रत रखने वालों को इस दिन हवन जरूर करना चाहिए और किसी जरुरतमंदों को भोजन कराना चाहिए।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्मा जी का ब्रह्म सरोवर पुष्कर में अवतरण हुआ था।
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भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था।
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त्रिपुरासुर का हुआ था वध
इस संदर्भ में एक कथा है कि त्रिपुरासुर नाम के दैत्य के आतंक से तीनों लोक भयभीत थे। त्रिपुरासुर ने स्वर्ग लोक पर भी अपना अधिकार जमा लिया था। त्रिपुरासुर ने प्रयाग में काफी दिनों तक तप किया था। उसके तप से तीनों लोक जलने लगे, तब ब्रह्मा जी ने उसे दर्शन दिए। त्रिपुरासुर ने उनसे वरदान मांगा कि उसे देवता, स्त्री, पुरुष, जीव ,जंतु, पक्षी, निशाचर न मार पाएं। इसी वरदान से त्रिपुरासुर अमर हो गया और देवताओं पर अत्याचार करने लगा। सभी देवताओं ने मिलकर ब्रह्मा जी से इस दैत्य के अंत का उपाय पूछा। ब्रह्मा जी ने देवताओं को त्रिपुरासुर के अंत का रास्ता बताया। देवता भगवान शंकर के पास पहुंचे और उनसे त्रिपुरासुर को मारने के लिए प्रार्थना की। तब महादेव ने त्रिपुरासुर का वध किया।