7 अप्रैल 2019 को झूलेलाल जयंती मनाई जाएगी। सिंधी समाज के इष्टदेव भगवान झूलेलाल है। झूलेलाल जंयती सिंधी समाज के लोग बहुत ही उत्साह और जोश के साथ मनाते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार झूलेलाल जयंती चैत्र मास की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। झूलेलाल भगवान वरुणदेव के अवतार है। भगवान झूलेलाल की जंयती को सिंधी समाज चेटीचंड के रूप में मनाता है। जिसे सिंधी नववर्ष के रूप में भी मनाया जाता है। चेटी चंड हिंदू कैलेंडर के अनुसार नवरात्रि के दूसरे दिन अर्थात चैत्र शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है। सिंधी समाज में मान्यता है कि जल से ही सभी सुखों और मंगलकामना की प्राप्ति होती है इसलिए इसका विशेष महत्व है।
मान्यता
सिंधी समाज के अनुसार सिंधु प्रांत में मिरखशाह नामक शासक राज करता था उसके राज्य में प्रजा पर अत्याचार उसके द्वारा अत्याचार करने लगा था। इसके बाद सिंधी समाज ने 40 दिनों तक कठिन साधना की थी। तब सिंधु नदी में से भगवान झूलेलाल प्रकट हुए और कहा मैं 40 दिन बाद जन्म लेकर मिरखशाह के अत्याचारों से प्रजा को मुक्ति दिलाउंगा। इसके बाद चैत्र माह की द्वितीया तिथि को एक बालक ने जन्म लिया जिसका नाम उडेरोलाल रखा गया। उस बालक ने मिरखशाह के अत्याचार से सभी की रक्षा की। चेटीचंड के दिन सिंधी समाज के लोग झूलेलाल का उत्सव मनाते हैं और मीठे चावल, उबले नमकीन चने और शरबत का प्रसाद बांटते हैं।
एक अन्य मान्यता के अनुसार जब सिंधी समाज के व्यापारी जलमार्ग से गुजरते थे तो कई विपदाओं का सामना करना पड़ता था। ऐसे में इस समाज की महिलाएं अपने पति की सकुशलता की कामना के लिए जल के देवता भगवान झूलेलाल से मन्नतें मानती थीं। जब पुरुष वर्ग सकुशल लौट आता था, तब चेटीचंड को उत्सव के रूप में मनाया जाता था।