सनातन धर्म में दीपावली और होली के बाद आने वाली द्वितीया तिथि को भाई दूज कहा जाता है। यह पारंपरिक पर्व भाई-बहन के बीच स्नेह के बंधन को मजबूत करता है। बहुत जगह भाई दूज को भ्रातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर और फल,मिठाई और उपहार देकर उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं, भाई भी बदले में अपनी बहन को हर विषम परिस्थिति में उसकी रक्षा का वचन देता है।मान्यता है कि भाईदूज पर बहनों के तिलक लगाने से भाई की आयु बढ़ती है,उसके सभी संकट दूर होते हैं।
क्या कहती है भाई दूज की कथा
शास्त्रों के अनुसार, एक गांव में एक बूढ़ी औरत रहा करती थी। उसके एक पुत्र और एक पुत्री थी। बुढ़िया ने अपनी पुत्री की शादी कर दी थी। एक बार होली के बाद भाई ने अपनी मां से अपनी बहन के यहां जाकर तिलक कराने का आग्रह किया, तो बुढ़िया ने अपने बेटे को बहन के घर जाने की अनुमति दे दी। बुढ़िया का बेटा एक जंगल से गया जहां उसे एक नदी मिली उस नदी ने कहा- 'में तेरा काल हूं और मैं तेरी जान लूंगी। इस पर बुढ़िया का बेटा बोला पहले मैं अपनी बहन से तिलक करा लूं फिर तू मेरे प्राण हर लेना। इसके बाद वह आगे चला जहां उसे एक शेर मिला बुढ़िया के बेटे ने शेर से भी यही कहा। इसके बाद उसे एक सांप मिलता है उसने सांप से भी यही कहा। उसके बाद वह अपनी बहन के घर पहुंचता है।
उस समय उसकी बहन सूत काट रही थी और भाई के आवाज़ लगाने पर वह आवाज़ को अनसुना कर देती है।लेकिन जब भाई दोबाराआवाज लगाता है तो उसकी बहन बाहर आ जाती है। इसके बाद उसका भाई तिलक कराकर दुखी मन से बहन से विदा लेता है। इस पर बहन उसके दुख का कारण पूछती और भाई उसे सब बता देता है। बहन कहती है कि रुको भाई मैं पानी पीकर आती हूं और वह एक तालाब के पास जाती है जहां उसे एक बुढ़िया मिलती है और वह उस बुढ़िया से अपनी इस समस्या का समाधान पूछती है। इस पर बुढ़िया कहती है यह तेरे ही पिछले जन्मों का कर्म है जो तेरे भाई को भुगतना पड़ रहा है। अगर तू अपने भाई को बचाना चाहती है तो उसकी शादी होने तक वह हर विपदा को टाल दे तो तेरा भाई बच सकता है।
इसके बाद वह अपने भाई के पास जाती है और कहती है कि मैं तुझे घर छोड़ने के लिए चलूंगी और वह शेर के लिए मांस, सांप के लिए दूध और नदी के लिए ओढ़नी लाती है। इसके बाद दोनों आगे बढ़ते हैं रास्ते में उन्हें पहले शेर मिलता है तो उसकी बहन शेर के आगे मांस डाल देती है। उसके बाद आगे उन्हें सांप मिलता है , उसे दूध दे देती है ।और अंत में उन्हें नदी मिलती है जिस पर वह ओढ़नी डाल देती है। इस तरह से सभी संकटों का सामना करते हुए बहन अपने भाई की जान को बचा लेती है।भाईदूज के पर्व पर सभी बहनें अपने भाई के संकटो को दूर करने के लिए इस कथा को सुनकर अपना व्रत खोलती हैं।