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Hariyali Teej 2026: सुहागिनों का महापर्व हरियाली तीज आज, जानिए क्यों मनाया जाता है यह त्योहार

Sat, 15 Aug 2026 05:24 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज सुहागिन महिलाओं का पर्व होता है। इस दिन विवाहित महिलाएं 16 श्रृंगार करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा- आराधना करती हैं। 
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Hariyali Teej 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
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विस्तार
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Hariyali Teej 2026: सावन का पवित्र महीना चल रहा है और आज श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। सावन शुक्ल पक्ष का बड़ा व्रत हरियाली तीज आज है। हरियाली  तीज का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत ही खास पर्व होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष विधान होता है। इस तिथि पर बारिश का मौसम रहता है और चारों तरफ हरियाली छाई रहती है इस कारण से इसे हरियाली तीज कहा जाता है। तृतीया तिथि माता पार्वती को समर्पित होती है इस कारण से इस गौरी तीज के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता पार्वती की पूजा, व्रत रखने से वैवाहिक जीवन सुखी रहता है। इसके अलावा कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना के लिए हरियाली तीज का व्रत रखती है। आइए जानते हैं हरियाली तीज का व्रत का महत्व। 
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क्यों मनाई जाती है हरियाली तीज
सावन महीने में आने वाली हरियाली तीज के त्योहार का विशेष महत्व होता है। हरियाली तीज माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-आराधना से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए वर्षों तक कठोर तप किया था। जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने श्रावण शुक्ल तृतीया के दिन पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तब से हर वर्ष सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है। 

 सुहागिनों का महापर्व हरियाली तीज
हिंदू धर्म में हरियाली तीज का त्योहार वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। हरियाली तीज विवाहित स्त्रियों सोलह श्रृंगार करना विशेष फलदायी माना गया है।
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हरियाली तीज उमंग, उत्साह और श्रृंगार का पर्व
हरियाली तीज पर सुहागिन महिलाएं विशेष रूप से श्रृंगार करती हैं। इस दिन महिलाएं 16 श्रृंगार करती हैं। इस दिन महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, हरी चूड़ियां और मेहंदी लगाती हैं, जो सौभाग्य और हरियाली का प्रतीक हैं। लोकगीतों और झूलों से पूरा वातावरण उल्लासमय हो जाता है। 

सिंजारा की परंपरा
हरियाली तीज पर नवविवाहित बेटियों को ससुराल से मायके बुलाया जाता है जिसे सिंजारा कहते हैं। इस पर्व पर ससुराल की तरफ सिंजार भेजने की परंपरा होती है। जिसमें वस्त्र, गहने, श्रृंगार-सामग्री, मेहंदी, मिठाइयाँ और घेवर शामिल होते हैं।

हरियाली तीज पूजन विधि
हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजन का विशेष महत्व होता है।  इस दिन स्त्रियां मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाती हैं। सुहाग की सामग्री जैसे चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, कंघी आदि थाली में सजाकर माता पार्वती को अर्पित किया जाता है। नैवेद्य में खीर, पूरी, हलुआ या मालपुए चढ़ाए जाते हैं। पूजा में हरियाली तीज की कथा जरूर सुनी जाती है। 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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