फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज कल ,जानिए क्यों मनाया जाता है यह पर्व और क्या होती है परंपरा

Fri, 14 Aug 2026 07:57 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Hariyali Teej 2026: हर वर्ष हरियाली तीज का त्योहार सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। जिसमें सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान होता है। 
विज्ञापन
हरियाली तीज की शुभकामनाएं! - फोटो : AI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Hariyali Teej 2026: 15 अगस्त 2026 को हरियाली तीज का पर्व है। यह पर्व मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं का पर्व होता है जिसमें पति की लंबी आयु के लिए व्रत रहती है और भगवान शिव-माता पार्वती की पूजा करती हैं। हिंदू पंचाग के अनुसार हरियाली तीज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पति के लिए उपवास रखकर शिव-गौरी का पूजन करती हैं। 
विज्ञापन


शिव-गौरी मिलन का उत्सव
माँ पार्वती के शिव से पुनर्मिलन की स्मृति में यह त्यौहार मनाया जाता है। शास्त्रों में वर्णन है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया,उससे प्रसन्न होकर शिव ने श्रावण शुक्ल तीज के दिन ही माँ पार्वती को अपनी पत्नी रूप में स्वीकार किया। तभी से अखंड सौभाग्य का प्रतीक यह दिन भारतीय परंपरा में पति-पत्नी के प्रेम को और प्रघाढ़ बनाने तथा आपस में श्रद्धा और विश्वास कायम रखने का पर्व बन गया। 

इसके अलावा यह पर्व पति-पत्नी को एक दूसरे के लिए त्याग करने का संदेश भी देता है। इस दिन कुंवारी कन्याएं व्रत रखकर अपने लिए शिव जैसे वर की कामना करती हैं वहीँ विवाहित महिलाएं अपने सुहाग को भगवान शिव तथा माता पार्वती से अक्षुण बनाये रखने की कामना करती हैं।
विज्ञापन


क्या है हरियाली तीज की परंपरा 
श्रावणी तीज प्रकृति के रंग में रचा-बसा त्यौहार है, इस दिन हरी चूड़ियाँ,हरे वस्त्र पहनने,सोलह शृंगार करने और मेहंदी रचाने का विशेष महत्व है।महिलाएं बड़े-बड़े वृक्षों पर झूला डालकर सखियों संग झूलती हैं और शिव-पार्वती से सम्बंधित गीत गाती हैं।इस त्यौहार पर विवाह के पश्चात पहला सावन आने पर नवविवाहित लड़कियों को ससुराल से पीहर बुला लिया जाता है।लोकमान्य परंपरा के अनुसार नव विवाहिता लड़की के ससुराल से इस त्यौहार पर सिंजारा भेजा जाता है जिसमें वस्त्र,आभूषण,श्रृंगार का सामान,मेहंदी,घेवर-फैनी और मिठाई इत्यादि सामान भेजा जाता है। इस दिन महिलाएं मिट्टी या बालू से मां पार्वती और शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं।

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव और देवी पार्वती ने इस तिथि को सुहागन स्त्रियों के लिए सौभाग्य का दिन होने का वरदान दिया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो सुहागन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करके भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं,उनको सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
 
पूजन में सुहाग की सभी सामिग्री को एकत्रित कर थाली में सजाकर माता पार्वती से मन ही मन अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए अर्पित करती हैं व तीज माता की कथा सुनती हैं।पूजा के बाद इन मूर्तियों को नदी या किसी पवित्र जलाशय में प्रवाहित कर दिया जाता है।इसके साथ-साथ वृक्षों,हरी-भरी फसलों,वरुणदेव तथा पशु-पक्षियों को भी आज के दिन पूजने की परंपरा है। 

Hariyali Teej 2026: रिश्ते में है मनमुटाव? हरियाली तीज पर सूर्यास्त के बाद करें सरल उपाय, बढ़ेगा आपसी तालमेल

Nag Panchami 2026: 16 या 17 अगस्त कब है नाग पंचमी? जानें सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें