श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली हरियाली तीज सुहागिन स्त्रियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है। जो महिलाएं पहली बार यह व्रत कर रही हैं, उनके लिए यह एक नया और पावन अनुभव होता है। इस दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखकर व्रत को पूर्ण श्रद्धा से किया जाए तो न केवल सौभाग्य की प्राप्ति होती है, बल्कि वैवाहिक जीवन में प्रेम, सामंजस्य और समर्पण भी बना रहता है।
1. व्रत की पवित्रता बनाए रखें
हरियाली तीज का व्रत निर्जला उपवास के रूप में किया जाता है, अर्थात इस दिन जल और अन्न का त्याग कर पूरी श्रद्धा से व्रत रखा जाता है। यदि स्वास्थ्यवश यह संभव न हो, तो फलाहार का विकल्प चुना जा सकता है। व्रत करते समय मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखना अति आवश्यक है।
2. मां पार्वती की पूजा विधिपूर्वक करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने 108 जन्मों तक तप कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। अतः हरियाली तीज के दिन उन्हें शृंगार सामग्री, फल-फूल, बेलपत्र, अक्षत और धूप-दीप से पूजन करें। व्रत कथा का श्रवण करें और सौभाग्य की कामना करें।
3. पहली बार व्रत कर रही महिलाएं करें व्रत संकल्प
व्रत की शुरुआत से पूर्व भगवान शिव और माता पार्वती के सामने हाथ जोड़कर संकल्प लें कि आप यह व्रत पूरे नियम और श्रद्धा से करेंगी। पहली बार व्रत कर रही स्त्रियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें इस दिन किसी भी प्रकार के क्रोध, कटु वचन या बुरे विचार से स्वयं को दूर रखना चाहिए।
4. सास-ससुर का आशीर्वाद लें, सुहाग सामग्री भेंट करें
हरियाली तीज पर पहली बार व्रत रखने वाली स्त्रियों को अपनी सास-ससुर के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। साथ ही, विवाहिता स्त्रियों को सास के लिए वस्त्र, मिठाई, सुहाग की चीजें (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी आदि) भेंट करनी चाहिए, जिसे सृजन सामग्री कहा जाता है।
5. जीवन साथी संग लें ये पांच संकल्प
हरियाली तीज न केवल व्रत का दिन है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, समझ और विश्वास को भी गहरा करने का अवसर है। पहली बार व्रत कर रही महिलाएं अपने पति के साथ मिलकर ये पांच संकल्प अवश्य लें:
- एक-दूसरे के प्रति आजीवन सच्ची निष्ठा और समर्पण बनाए रखेंगे।
- कठिन समय में साथ निभाने की शपथ लेंगे।
- एक-दूसरे की भावनाओं और स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे।
- घर-परिवार की जिम्मेदारियों को मिलकर निभाएंगे।
- धर्म, परंपरा और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएंगे।