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Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव पर सभी संकट दूर करने के लिए बजरंगबली का ऐसे करें विशेष पूजन

Wed, 01 Apr 2026 11:23 AM IST
Vinod Shukla धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Hanuman Jayanti 2026: हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी कलयुग के देवता माने जाते हैं और आज भी इस पृथ्वी पर मौजूद हैं। हर वर्ष चैत्र पूर्णिमा तिथि पर इनका जन्मोत्सव बड़ी ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। 
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Hanuman Jayanti 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Hanuman Jayanti 2026: चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाने वाली हनुमान जयंती, भक्तों के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का पर्व है। इस दिन हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में उनका विशेष पूजन किया जाता है। इस बार हनुमान जयंती 2 अप्रैल को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा साधक को बल, बुद्धि, विद्या और निर्भयता प्रदान करती है। पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि हनुमान जी की आराधना से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए जानते हैं हनुमान जयंती पर क्या-क्या करें जिससे भगवान हनुमान प्रसन्न हों और हर एक मनोकामनाओं की पूर्ति हो सके। 

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प्रातःकालीन स्नान और संकल्प
हनुमान जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत एवं पूजन का संकल्प लिया जाता है। मान्यता है कि शुद्ध मन और शरीर से किया गया संकल्प ही फलदायी होता है। इस दिन लाल या केसरिया वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह रंग हनुमान जी को प्रिय है।

हनुमान जी का अभिषेक और श्रृंगार
पूजन की शुरुआत हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के अभिषेक से होती है। पंचामृत- दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करने का विधान है। इसके पश्चात चोला चढ़ाने का विधान है, जिसमें सिंदूर और चमेली के तेल का उपयोग किया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि सिंदूर हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है, क्योंकि उन्होंने स्वयं को श्रीराम की दीर्घायु के लिए सिंदूर से आच्छादित किया था।

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पूजन में अर्पित किए जाने वाले विशेष प्रसाद

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हनुमान जयंती के दिन बूंदी के लड्डू, गुड़-चना, केले और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना गया है। रामायण की कथा के अनुसार, हनुमान जी को सादगी और भक्ति से अर्पित किया गया प्रसाद अधिक प्रिय होता है। इस दिन प्रसाद में सात्विकता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

मंत्र जाप और पाठ का महत्व
हनुमान जयंती पर मंत्र जाप और पाठ का विशेष महत्व बताया गया है। विशेष रूप से हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करने से साधक को अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता है कि इन स्तोत्रों के नियमित पाठ से भय, रोग और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और मन में आत्मविश्वास और साहस का संचार होता है।

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व्रत और नियमों का पालन
इस दिन अनेक भक्त व्रत भी रखते हैं। व्रत के दौरान फलाहार या केवल एक समय सात्विक भोजन करने का विधान है। साथ ही ब्रह्मचर्य, सत्य और संयम का पालन करने पर विशेष बल दिया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, व्रत रखने से मन और इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त होता है, जिससे भक्ति में स्थिरता आती है।

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दान-पुण्य और सेवा का महत्व
हनुमान जयंती पर दान और सेवा को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल दान करना चाहिए। साथ ही बंदरों को गुड़-चना या फल खिलाना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि उन्हें हनुमान जी का प्रतीक माना जाता है।

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