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Hanuman Jayanti 2024: हनुमान जन्मोत्सव पर करें इन मंत्रों का जाप, साथ ही पढ़ें आरती

Tue, 23 Apr 2024 11:03 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पवन पुत्र हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जन्मोत्सव का दिन सर्वोत्तम है। इस दिन बजरंगबली की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि हनुमान जी कलयुग में ऐसे देवता हैं, जिनके समक्ष कोई शक्ति नहीं टिक पाती है।
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Ram Navami 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Hanuman Janmotsav 2024: पवन पुत्र हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जन्मोत्सव का दिन सर्वोत्तम है। इस दिन बजरंगबली की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि हनुमान जी कलयुग में ऐसे देवता हैं, जिनके समक्ष कोई शक्ति नहीं टिक पाती है। इसलिए वीर बजरंगी की कृपा प्राप्त करने के लिए मंगलवार को उनकी पूजा की जाती है। इसके अलावा हर साल चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जयंती (जन्मोत्सव) मनाई जाती है। इस साल हनुमान जन्मोत्सव का पर्व 23 अप्रैल 2024 के दिन मनाया जा रहा है।

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यह दिन हनुमान भक्तों के लिए बहुत खास होता है। इस दौरान मंदिरों में कई भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस दिन जहां कई उपाय किए जाते हैं वहीं कुछ मंत्रों का भी जाप करना शुभ होता है। यदि हनुमान जी की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप कर लेते हैं, तो संकट मोचन हनुमान आपके संकटों का निवारण करते हैं। साथ ही शत्रुओं से भी छुटकारा मिलता है। आइए उन शक्तिशाली मंत्रों के बारे में जान लेते हैं।

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हनुमान जी के मंत्र

भय नाश करने के लिए हनुमान मंत्र  

हं हनुमंते नम:।

स्वास्थ्य के लिए मंत्र  
नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा

संकट दूर करने का मंत्र
ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।

कर्ज मुक्ति के मंत्र 
ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।

मनोकामना के लिए मंत्र 
ॐ महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते. हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये। नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।

प्रेत भुत बाधा के लिए मंत्र 
हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल: अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।

हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
 
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।
 
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।
 
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।
 
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
 
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।
 
पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।
 
बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।
 
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।
 
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
 
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
 
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
 
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है
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