Ganga Saptami 2026: आज यानी 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी का पर्व है। हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी का पावन पर्व मनाया जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुई थीं, इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी या गंगा जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष सप्तमी तिथि का आरंभ 22 अप्रैल को रात 10 बजकर 50 मिनट पर होगा और समापन 23 अप्रैल को रात 8 बजकर 50 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार 23 अप्रैल को ही गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन गंगा स्नान, पूजन और दान करने से व्यक्ति को रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान और पापों से मुक्ति प्राप्त होती है।
4. पौराणिक मान्यता के अनुसार, माँ गंगा का उद्गम भगवान विष्णु के चरणों से हुआ है। वामन अवतार के समय ब्रह्माजी ने भगवान विष्णु के चरण धोए, जिससे निकला जल गंगा के रूप में प्रकट हुआ। बाद में यह जल भगवान शिव की जटाओं में समाहित हो गया और वहीं से पृथ्वी पर प्रवाहित हुआ।
5. धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि गंगा तीन धाराओं भागीरथी, मंदाकिनी और भोगवती के रूप में तीनों लोकों में प्रवाहित होती हैं। ये धाराएं स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल लोक को जोड़ती हैं, जिससे गंगा को त्रिलोक पावनी कहा जाता है।
6. यदि गंगा स्नान संभव न हो तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद उत्तर या ईशान कोण में माँ गंगा का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं और पुष्प अर्पित करें। गंगा सप्तमी की कथा सुनें या पढ़ें और भगवान विष्णु एवं भगवान शिव की विधिवत पूजा करें।
7. स्नान के समय “ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः” मंत्र का जप करें। पूजन के दौरान “ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा” मंत्र का उच्चारण शुभ माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है, इसलिए गरीबों की सहायता करें और गौ सेवा अवश्य करें। इससे कई जन्मों के पुण्य की प्राप्ति होती है।