ईद भाईचारे का त्योहार है। इसमें रिश्तेदारों, दोस्तों और अन्य करीबियों से मिलकर उन्हें ईद की मुबारकबाद दी जाती है। जगह-जगह मस्जिदों और ईदगाहों में ईद की नमाज अदा की जाती है। लेकिन इस समय देश में कोरोना का कहर है। ऐसे में सामाजिक दूरी का ध्यान रखना आवश्यक है।
संक्रमण को मद्देनजर रखते हुए दारुल उलूम ने एक अहम फतवा जारी किया है जिसके तहत मस्जिद या फिर अन्य जगहों पर ईमाम सहित तीन या पांच लोगों के साथ ईद-उल-फितर की नामज अदा करने को कहा गया है। यह भी कहा गया है कि मजबूरी में ईद की नमाज माफ है। विकल्प के तौर पर घरों में ही नमाज अदा की जा सकती है।
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, ईद का त्योहार शव्वाल की पहली तारीख को मनाया जाता है, जो रमजान महीने के खत्म होने के साथ शुरू होता है। वहीं आमतौर पर चांद का दीदार सउदी अरब में भारत से एक दिन पहले ही हो जाता है। ऐसी स्थिति में वहां ईद भारत से एक दिन पहले मनाई जाती है।
पवित्र कुरआन के मुताबिक, रमजान के पाक महीने में रोजे रखने के बाद अल्लाह एक दिन अपने बंदों को बख्शीश और ईनाम देते हैं। बख्शीश के दिन को ईद-उल-फितर के नाम से जाना जाता है। इस्लाम की तारीख के मुताबिक ईद उल फितर की शुरूआत जंग-ए-बद्र के बाद हुई थी। दरअसल इस जंग में मुसलमानों की फतेह हुई थी जिसका नेतृत्व स्वयं पैगंबर मुहम्मद साहब ने किया था। युद्ध विजय के बाद लोगों ने ईद मनाकर अपनी खुशी जाहिर की थी।