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Eid Milad Un Nabi 2024: कब है ईद-ए-मिलाद-उन-नबी? जानिए सही तारीख और महत्व

Thu, 12 Sep 2024 12:55 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इस्लाम धर्म में रबीउल अव्वल महीने की 12 तारीख को मिलादुन्नबी के दिन ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था। आइए जानते हैं कि इस साल ईद-ए-मिलाद-उन-नबी किस दिन मनाई जाएगी।
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Eid Milad Un Nabi 2024 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Eid Milad Un Nabi 2024 Date: इस्लाम धर्म में रबीउल अव्वल महीने की 12 तारीख को मिलादुन्नबी के दिन ईद-ए-मिलाद-उन-नबी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था। मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद का जन्म मक्का में हुआ था। कहा जाता है कि अल्लाह ने हजरत मोहम्मद को एक अवतार के रूप में भेजा था। पैगंबर मोहम्मद के वालिद अबदुल्ला बिन अब्दुल मुतलिब थे, जबकि वालेदा आमेना थीं। हर साल पैगंबर मोहम्मद के जन्म के जश्न के रूप में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मनाई जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल यानी 2024 में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी किस दिन मनाई जाएगी।

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ईद-ए-मिलाद-उन-नबी की सही तारीख 
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, इस साल ईद मिलाद उन नबी 16 सितंबर यानी सोमवार के दिन मनाई जाएगी। इस दिन के महत्व के बारे में बात की जाए तो, कहा जाता है कि समाज में पसरे अंधकार, जुआखोरी और लूटमार से लोग पीड़ित थे। ऐसे में बुराई को खत्म करने के लिए अल्लाह ने मोहम्मद साहब को धरती पर भेजा था।

जब मोहम्मद साहब बेहद छोटे थे, तभी मोहम्मद साहब के पिता की मृत्यु हो गई थी। ऐसे में उनके चाचा अबू तालिब ने उनका लालन-पालन किया था। हजरत मोहम्मद बचपन से ही दिन रात अल्लाह की इबादत में लीन रहा करते थे। वह मक्का की पहाड़ी की भी इबादत करते थे। जब मोहम्मद 40 वर्ष के हुए, तब उन्हें अल्लाह के जरिए संदेश प्राप्त हुआ, जिसके बाद से वे लोगों तक अल्लाह के संदेश पहुंचाने लगे। 
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हजरत मोहम्मद ने अल्लाह से वादा किया था कि वे इस्लाम धर्म की अगुवाई करेंगे। माना जाता है कि लोगों को इस्लाम धर्म समझाने में मोहम्मद साहब को बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इतना ही नहीं उन्होंने दुश्मनों के जुल्म और सितम भी सहे। लेकिन फिर भी वह अपने लक्ष्य से हटे नहीं और लगातार लोगों को इस्लाम का महत्व समझाते रहे। 

हर वर्ष ईद के मौके पर घर से लेकर मस्जिद सजाए जाते हैं। इसे बहुत बड़े जश्न का दिन माना जाता है। इस्लाम धर्म के लोग इस खास मौके पर दरगाह जाते हैं और हजरत मोहम्मद के संदेश पढ़ते हैं। इस दिन जगह-जगह पर कार्यक्रमों का आयोजन किए जाता है। साथ ही अल्लाह की इबादत में पूरा दिन बिताया जाता है।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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