आज देशभर में विजयादशमी के त्योहार की धूम है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर ही भगवान राम ने रावण का वध किया था। जिसके कारण अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में विजयादशमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन देश के कई हिस्सों में रावण दहन किया जाता है। इस दिन देवी अपराजिता की पूजा के साथ शस्त्र पूजा का भी विधान होता है। दशहरा पर कुछ उपाय किया जाता है जिससे घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
दशहरा पर रावण दहन का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, दशहरा पर रावण दहन प्रदोष काल में करने का विधान होता है। आज 20 अक्तूबर को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा जो रात 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। रावण दहन के लिए यह मुहूर्त बहुत ही अच्छा और शुभ माना जाता है।
दशहरा एक अबूझ मुहूर्त
सनातन धर्म ग्रंथों के अनुसार दशहरा का पर्व एक अबूझ मुहूर्त है। अबूझ मुहूर्त में कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखें किया जा सकता है। अबूझ मुहूर्त में खरीदारी, भूमिपूजन, व्यापार आरम्भ करना, गृहप्रवेश आदि जैसे सभी तरह के मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। ज्योतिष में विजयादशमी को कोई भी शुभ कार्य करने के लिए श्रेष्ठ और सर्वसिद्धिदायक मुहूर्त माना जाता है।
विजयादशमी उपाय और मान्यताएं
- दशहरे पर कुछ उपाय बहुत ही कारगर माने जाते है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में दशहरे पर अगर कुछ ज्योतिषीय उपाय किए जाएं तो यह काफी लाभकारी और कल्याणकारी सिद्ध होता है।
- दशहरे पर भगवान श्रीराम, देवी भगवती, मां लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और हनुमान जी की विशेष रूप से आराधना करके सभी के लिए शुभ फलों की प्राप्ति की जा सकती है।
- दशहरे पर देवी अपराजिता की पूजा करना बहुत ही अच्छा माना गया है। इस दिन देवी अपराजिता को अपराजिता के फूलों से बनी माला जरूर अर्पित करना चाहिए।
- दशहरा के दिन श्रीयंत्र की पूजा करें, इससे जीवन में पैसों की तंगी से छुटकारा मिल सकता है।
- दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन को शुभ संकेत माना जाता है। नीलकंठ के दर्शन से यह संकेत मिलता है कि व्यक्ति की सभी परेशानियाँ दूर होंगी और उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे।
- दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाने वाला त्योहार होता है। इस दिन कुछ सरल उपाय करने की परंपरा है जिससे राहु-केतु और शनि का बुरा प्रभाव दूर होता है।
- दशहरा पर शमी के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन शाम को शमी के पेड़ की पूजा और इसके नीचे दीपक जरूर जलाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इस उपाय से राहु-केतु और शनि से जुड़े कुछ उपायों से मुक्ति मिलती है।
- विजयादशमी पर हनुमान जी की पूजा और इनसे जुड़े कुछ उपाय करना बहुत ही शुभ माना जाता है। दशहरे के दिन पीपल के पत्ते पर सिंदूर से भगवान श्रीराम का नाम लिखना चाहिए। फिर इस पत्तों को हनुमान मंदिर जाकर उनकी मूर्ति के नीचे रख दें। इसे उपाय से शनि से संबंधित कुछ उपाय दूर होता है और साथ ही कुंडली में राहु-केतु से जुड़े अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
- दशहरा पर जब रावण के पुतले का दहन हो तो उसके बाद पुतले की जली हुई लकड़ी को अपने घर लाना शुभ माना गया है। रावण दहन के बाद वहां से राख लेकर उसे एक लाल पोटली में बांधकर रखना शुभ माना जाता है। फिर से घर के पूर्व दिशा में रख दें। इससे कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है साथ ही नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है।