आज दीपावली का त्योहार देश-विदेश में मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में दिवाली के पर्व का विशेष महत्व होता है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश के जीत के रूप में मनाते हैं। दिवाली पर घरों को विशेष रूप से फूलों, रंगोली और दीयों से सजाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवाली की रात धन और सुख-समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और घरों में अंश रूप में वास करती हैं। दिवाली पर प्रदोष काल में माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान गणेश की विधिवत रूप से पूजा होती है। दिवाली पर पूजा की शुरुआत में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होती है और दिवाली की पूजा के अंत में गणेश जी की आरती अवश्य की जाती है। आइए जानते हैं भगवान गणेश की संपूर्ण आरती।
भगवान गणेश की आरती
श्रीगणेश आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अन्धे को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ।।
'सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
आरती शुरू करने से पहले ये मंत्र बोलें -
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।।
ॐ गं गणपतये नमः
गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।'
त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।