दीपावली की तारीख को लेकर संशय की स्थिति बरकरार
- फोटो : अमर उजाला
Diwali 2024 Date Kab Hai Diwali Laxmi Puja Date: 02 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या है और इसी के साथ पितृ पक्ष का समापन हो जाएगा, फिर इसके अगले दिन यानी 03 अक्तूबर को शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होंगे। जिसमें नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-आराधना की जाएगी और दशमी तिथि दशहरे का पर्व मनाया जाएगा। दशहरे के बाद पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली का महापर्व है। दीपावली का त्योहार हिंदू धर्म का एक बहुत ही प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे देशभर में बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को भगवान राम 14 साल के वनवास काटने के बाद और रावण का वध करके वापस अयोध्या आए थे, जिसकी खुशी में अयोध्या वासियों ने पूरे नगर को दीपक जलाकर खुशियां मनाई थी। इसके साथ ही दिवाली पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की करने का विधान होता है। इस वर्ष दीपावली की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के पंडितों और ज्योतिषाचार्य के मत के अनुसार दीपावली की सही तिथि कब है और देशभर में दीपात्सव का पर्व कब मनाया जाएगा।
दिवाली 2024 तिथि
पंचांग की गणना के मुताबिक दिवाली का पर्व हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाने का विधान होता है। इस वर्ष 31 अक्तूबर को दोपहर 3 बजकर 52 मिनट से अमावस्या तिथि की शुरुआत होगी और समापन 01 नवंबर को शाम 5 बजकर 13 मिनट होगा। ऐसे में अमावस्या की तिथि के आधार पर कुछ विद्वान पंडित दिवाली 31 अक्तूबर को मनाने की सलाह दे रहे हैं तो वहीं कुछ 01 नवंबर दिवाली मनाए जाने की बात कह रहे हैं।
क्या कहते हैं काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के ज्योतिषाचार्य
इस वर्ष दिवाली की तारीख को लेकर कई विद्वानों में मतभेद है। काशी विद्वत कर्म कांड परिषद के पंडित और विद्वानों ने दीपावली की लेकर अपना मत दिया है। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा है कि पश्चिम पंचांगों में दिवाली की डेट को कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसमें दिवाली 01 नवंबर को बताई जा रही है। लेकिन काशी के पंचांग और विद्वान पंडितों के मुताबिक दीपावली की तिथि को लेकर किसी भी तरह का कोई संशय या भ्रम नहीं है। दीपावली का पर्व इस वर्ष 31 अक्तूबर को ही मनाया जाना सही है।
- परिषद के मुताबिक कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 31 अक्तूबर को दोपहर 3 बजकर 52 मिनट से शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन यानी 01 नवंबर को शाम के 5 बजकर 13 मिनट पर रहेगी। अमावस्या तिथि के समापन के बाद प्रतिपदा तिथि की शुरुआत होगी। परिषद के मुताबिक दिवाली पर माता लक्ष्मी पूजा का सर्वोत्तम समय सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल और स्थिर लग्न में होता है। प्रदोष काल में पड़ने वाली अमावस्या पर लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है। कार्तिक अमावस्या के दिन दिवाली का विशेष महत्व है। इस दिन लक्ष्मी पूजा की जाती है। देवी लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश, देवी सरस्वती और महाकाली की भी पूजा होती है। शास्त्रों के अनुसार दिवाली पर लक्ष्मी पूजा प्रतिपदा तिथि में करने का विधान नहीं होता है। परिषद के विद्वानों के मुताबिक 31 अक्तूबर की शाम से रात्रि व्यापिनी अमावस्या लगी रहेगी। जिसके कारण से दिवाली 31 अक्तूबर को ही मनाया जाना शुभ होगा।
- लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल जिसे संध्या काल कहते है का समय सबसे अच्छा माना जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त को कहते हैं। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है।
- कार्तिक माह की अमावस्या के दिन और प्रदोष काल में दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन करने की वैदिक परपंरा है। ऐसे में अगर दो दिनों तक अमावस्या तिथि प्रदोष काल का स्पर्श न करें तो दूसरे दिन दिवाली को मनाने का विधान है। वही एक अन्य मत के अनुसार अगर दो दिन तक अमावस्या तिथि प्रदोष में न हो तो पहले दिन दिवाली मनाई जानी चाहिए।
- वहीं अगर किसी वर्ष अमावस्या तिथि न पड़े यानी इस अमावस्या तिथि का विलोपन हो जाए यानी चतुर्दशी के बाद सीधे प्रतिपदा आरंभ हो जाए तो प्रतिपदा के दिन दिवाली नहीं मनाई जानी चाहिए। ऐसी स्थिति में चतुर्दशी तिथि को ही दिवाली मनाने का विधान शास्त्रों में है।
- 31 अक्तूबर को रात्रिव्यापिनी अमावस्या तिथि होने के कारण लक्ष्मी पूजन और दीपोत्सव का मनाए जाने का शुभ मुहूर्त है। शास्त्रों में दीपावली का त्योहार और लक्ष्मी पूजा हमेशा प्रदोष काल में ही होती है, ऐसे में 01 नवंबर को प्रदोष व्यापिनी अमावस्या तिथि नहीं है जिसके कारण दिवाली 31 अक्तूबर को ही है और धनतेरस 29 अक्तूबर को रहेगा।
- दीपावली प्रदोषव्यापिनी अमावस्या में मनाई जाती है। इसमें उदया तिथि का कोई लेना देना नहीं होता है। अमावस्या की शुरुआत 31 अक्तूबर को सूर्यास्त के साथ ही प्रदोष काल हो रहा है, जो एक नवंबर को शाम 5:13 बजे तक है। इसलिए अमावस्या की तिथि 31 अक्तूबर मानी जाएगी।
- परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि इस बार दीपावली की तिथि को लेकर कोई भ्रम नहीं है। काशी के पंचांग और विद्वान 31 अक्तूबर को ही दीपोत्सव, लक्ष्मी और मां काली के पूजन पर एकमत हैं।