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धनतेरस 2026: धनतेरस पर पूजा के 3 सबसे शुभ मुहूर्त, इन आरती-मंत्रों से करें कुबेर महाराज की पूजा

Fri, 06 Nov 2026 07:07 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Dhanteras 2026: धनतेरस 2026 पर भगवान धन्वंतरि और कुबेर महाराज की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के साथ आरती और मंत्रों का जाप करने से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है। जानें धनतेरस की आरती और पूजा के मंत्र।
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Dhanteras 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
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विस्तार
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Dhanteras 2026: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि और कुबेर महाराज की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि धनतेरस पर नई वस्तुएं घर लाना शुभ होता है। वहीं, प्रदोष काल में पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी माना जाता है। इससे जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इस साल धनतेरस का पर्व 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन खरीदारी के साथ विधि-विधान से पूजा करना और आरती व मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसे में आइए जानते हैं धनतेरस की आरती और पूजा के मंत्र।

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कुबेर देव की आरती 

ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे । 
शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे । ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े, स्वामी भक्त कुबेर बड़े । 
दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे । 
योगिनी मंगल गावैं, सब जय जय कार करैं ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे । 
दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

भांति भांति के व्यंजन बहुत बने, स्वामी व्यंजन बहुत बने । 
मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े । 
अपने भक्त जनों के, सारे काम संवारे ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

मुकुट मणी की शोभा, मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले । 
अगर कपूर की बाती, घी की जोत जले ॥ ॥ '
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

यक्ष कुबेर जी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे । 
कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे ॥ ॥ 
ऊँ जय यक्ष कुबेर हरे...॥

श्री भगवान धन्वंतरि जी की आरती
ॐ जय धन्वन्तरि देवा, स्वामी जय धन्वन्तरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा ॥
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।
स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

गणेश जी की आरती 
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

मां लक्ष्मी की आरती 
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। 
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। 
मैया सुख संपत्ति दाता। 
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता। 
मैया तुम ही शुभदाता। 
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। 
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। 
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। 
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता। 
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।

ऊं  जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। 
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। 
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
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धन्वंतरि मंत्र
ॐ धन्वंतराये नमः।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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