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Dhanteras Puja Vidhi 2025: धनतेरस पर कैसे करें भगवान धन्वंतरि, कुबेर और यमराज की पूजा, जानिए पूजन शुभ मुहूर्त

Thu, 16 Oct 2025 01:57 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Dhanteras Puja Vidhi 2025:पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन उनकी विशेष पूजा का विधान है। धनतेरस के अवसर पर धन के देवता कुबेर और मृत्यु के देवता यमराज की आराधना भी की जाती है।
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Dhanteras 2025: धनतेरस पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Dhanteras Puja Vidhi 2025: दीपावली पर्व का पहला दिन धनतेरस के रूप में मनाया जाता है, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। यह दिन आरोग्य, आयु और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन उनकी विशेष पूजा का विधान है। धनतेरस के अवसर पर धन के देवता कुबेर और मृत्यु के देवता यमराज की आराधना भी की जाती है। कुबेर की पूजा से धन-धान्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है, जबकि यमराज की पूजा अकाल मृत्यु से रक्षा करती है। इस प्रकार धनतेरस आरोग्य और समृद्धि का पावन पर्व है।

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ऐसे करें भगवान धन्वंतरि को प्रसन्न
धनतेरस के दिन प्रदोष काल में धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। आरोग्य की उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा में धनवंतरि की आराधना करने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। दीपोत्सव के इन पांच दिनों में प्रथम पूज्य गणेशजी के साथ ही धनाधिपति कुबेर और देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान भी है। दीपक रखने से पूर्व खील या चावल रखकर उसके ऊपर दीपक जलाएं। अब एक कलश में शुद्ध जल लेकर सभी देवताओं को आचमन कराएं और फिर रोली, कुमकुम, हल्दी, गंध, अक्षत, पान, पुष्प, नैवेद्य या मिष्ठान, फल, दक्षिणा आदि उन्हें अर्पित कर प्रणाम करें और अपने रोगों के नाश की कामना करें। 

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परिवार में दीर्घायु और आरोग्यता बनी रहे इसके लिए पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः' मंत्र का उच्चारण करते रहें। आयुर्वेद के अनुसार भी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति स्वस्थ शरीर और दीर्घायु से ही संभव है। शास्त्र भी कहते हैं कि 'शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम्' अर्थात-धर्म का साधन भी निरोगी शरीर ही है, तभी आरोग्य रुपी धन के लिए ही भगवान धन्वंतरि की पूजा आराधना की जाती है। माना जाता है कि इस दिन धन्वंतरि की पूजा मनुष्य को वर्षपर्यंत निरोगी रखती है।  

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समृद्धि के लिए भगवान कुबेर की पूजा
धन के देवता कुबेर को आसुरी शक्तियों का हरण करने वाला देवता भी माना गया है। इस दिन सांयकाल में उत्तर दिशा में कुबेर यंत्र को स्थापित कर उन पर गंगाजल छिड़क कर रोली, चावल से तिलक करें, पुष्प चढ़ाएं और दीप जलाकर भोग लगाएं और इस मंत्र का जाप करें।
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ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये।
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥


इसके पश्चात कुबेर जी की आरती व प्रणाम करके अपनी सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।  

यमराज पूजा
वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी गई है। धनतेरस के दिन प्रदोषकाल में घर के मुख्य दरवाजे पर यमदेव का स्मरण करके दक्षिणमुख होकर अन्न की ढेरी पर तेल का चारमुखी दीपक स्थापित करना चाहिए। चूंकि यह दीपक मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त जलाया जाता है, इसलिए दीप जलाते समय पूर्ण श्रद्धा से उन्हें प्रणाम कर प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार पर अपनी दया दृष्टि बनाए रखें और किसी की अकाल मृत्यु न हो।

धनतेरस पूजन मुहूर्त
धनतेरस के दिन यानि 18 अक्टूबर को पूजन के लिए शुभ मुहूर्त प्रदोष काल यानी 07 बजकर 16 मिनट से लेकर 08 बजकर 20 मिनट तक है। इस दौरान आप भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

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