25 अक्तूबर को पांच दिवसीय महापर्व का पहला त्योहार धनतेरस है। यह दीपावली के एक दिन पहले झाड़ू खरीदने की परंपरा चली आ रही है। कहा जाता है कि धनतेरस पर खरीदी गई वस्तु जल्द खराब नहीं होती बल्कि उसमें तेरह गुना वृद्धि और हो जाती है। इसलिए लोग धनतेरस पर सोना, चांदी, भूमि, वाहन और बर्तन इत्यादि चीजों की खरीदारी करते हैं। अन्य वस्तुओं की तरह इस दिन झाड़ू खरीदने की भी अनोखी परंपरा रही है और जो लोग सोना-चांदी या उससे बने गहने खरीदने में असमर्थ होते है वो एक झाड़ू अवश्य खरीदते हैं। धनतेरस के दिन हर घर में एक नई झाड़ू जरूर मिलेगी।
मत्स्य पुराण के अनुसार झाड़ू को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है वहीं बृहत संहिता में झाड़ू को सुख-शांति की वृद्धि करने वाली और दुष्ट शक्तियों का सर्वनाश करने वाली बताया है। झाड़ू को घर में दरिद्रता को हटाने का कारक बताया गया है और इसके इस्तेमाल से मनुष्य की दरिद्रता भी दूर होती है। साथ ही इस दिन घर में नई झाड़ू से झाड़ लगाने से कर्ज से भी मुक्ति मिलती है।