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कब है देवशयनी एकादशी 24 या 25 जुलाई, जानिए चातुर्मास और भगवान के योग निद्रा का महत्व

Thu, 16 Jul 2026 07:13 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। देवशयनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास आरंभ हो जाता है। जिसमें चार माह के लिए सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य थम जाते हैं। 
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देवशयनी एकादशी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी  के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में इस एकादशी का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। देवशयनी एकादशी के साथ ही चार माह तक चलने वाला चातुर्मास का आरंभ हो जाता है। चातुर्मास में शुभ और मांगलिक कार्य करना वर्जित हो जाता है। चातुर्मास शुरू होने पर पूजा-पाठ, जप, तप और दान का महत्व बढ़ जाता है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी का पर्व  25 जुलाई को है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं इस तिथि का महत्व और पूजा शुभ मुहूर्त। 
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देवशयनी एकादशी 2026 
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जुलाई को सुबह 09 बजकर 13 मिनट से होगी और इसका समापन सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर होगा। इस तरह के उदया तिथि के अनुसार देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को है। 

देवशयनी एकादशी शुभ मुहूर्त 2026
देवशयनी एकादशी पर ब्रह्रा मुहूर्त में सुबह 04 बजकर 16 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा करना शुभ रहेगा। इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से लेकर दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। एकादशी पर पारण का समय 26 जुलाई को सुबह 5 बजकर 38 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। 
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देवशयनी एकादशी का महत्व 
हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, उपासना, व्रत और दान-पुण्य करना बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी पर व्रत रखने से पापों का नष्ट होता है और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन से ही चातुर्मास की शुरुआत होती हैं जिसमें साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर साधना करते हैं। इस व्रत को रखने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।   

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