Chhath Puja Morning Arag Time 28 October : हिंदू धर्म में छठ पर्व का विशेष महत्व होता है। छठ पर्व चार दिनों तक चलता है जो 25 अक्टूबर के शुरू होकर 28 अक्टूबर को सूर्योदय पर सूर्य देव को अर्घ्य देने के साथ पूरा होगा। छठ पर्व कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होकर सप्तमी तिथि तक चलता है। छठ पर्व का पहला दिन नहाय-खाय के साथ शुरू होता है, फिर दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य के साथ संपन्न होता है। 28 अक्तूबर को छठ पर्व का आखिरी दिन है। ऐसे में इस दिन व्रती सुबह किसी पवित्र नदी या तालाब में खड़े होकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते है, फिर इसके बाद चार दिनों तक चलने वाला लोक आस्था का महापर्व संपन्न होता है। आइए जानते है। 28 अक्तूबर 2025 को उषा काल का समय और पूजा विधि।
छठ पूजा 2025 उषाकाल अर्घ्य का समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार 28 अक्तूबर 2025 को सूर्योदय का समय सुबह 06 बजकर 30 मिनट का है। लेकिन अलग-अलग शहरों में सूर्योदय में कुछ देर के लिए बदलाव हो सकता है।
छठ पर्व के चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की विधि
- छठ पर्व का चौथा दिन उषा काल का अर्घ्य के रूप में मनाया जाता है।
- सबसे पहले व्रती उगते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करके पूजा करें।
- इस दिन व्रती साथ-सुथरे वस्त्र पहनें।
- पूजा की थाली में दूध, गंगाजल, हल्दी, सुपारी, अक्षत और दीपक रखें।
- इसके बाद किसी नदी में कमर तक पानी में खड़े होर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- अर्घ्य के बाद परिवार सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
- व्रती पूजा के पूरा होने के बाद प्रसाद को ग्रहण कर व्रत संपन्न करें।
छठी मईया की आरती
जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥
अमरुदवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥
ऊ जे सेववा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥