Chhath Puja Morning Araghya Time: भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित चार दिवसीय छठ महापर्व का आज चौथा और अंतिम दिन है। इस दिन व्रती प्रातःकाल उगते सूर्य को उषा अर्घ्य अर्पित करते हैं। जैसे ही सूर्य की पहली किरण जल को स्पर्श करती है, व्रती ठंडे पानी में खड़े होकर अपने परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। यह पूजन प्रायः नदी, तालाब या किसी पवित्र जलाशय के किनारे किया जाता है। उषा अर्घ्य के साथ ही कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से प्रारंभ हुआ यह महान व्रत पूर्ण हो जाता है।
उषा अर्घ्य का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 28 अक्तूबर 2025 को कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि सुबह 7:59 बजे तक रहेगी। इस दौरान सूर्योदय का शुभ समय 6:04 से 6:45 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।
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उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की विधि
छठ व्रत का पारण
चार दिन के इस कठिन व्रत का समापन आज उषा अर्घ्य के बाद पारण से किया जाएगा। लगभग 36 घंटे तक निर्जल व्रत रखने वाले साधक सबसे पहले पवित्र जल ग्रहण करते हैं, फिर प्रसाद के रूप में ठेकुआ, खीर, फल आदि का सेवन करते हैं। इसके साथ ही छठ व्रत की सभी विधियाँ पूर्ण हो जाती हैं।
छठ पूजा का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में छठ पूजा को पुत्रेष्टि यज्ञ के समान माना गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान सुख, दीर्घायु और समृद्धि की प्राप्ति होती है। जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति में बाधा होती है, उन्हें इस व्रत के पुण्य से मनोकामना पूर्ण होती है। ज्योतिष दृष्टि से भी छठ पूजा अत्यंत शुभ मानी गई है यह नवग्रहों के राजा सूर्य को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ उपाय है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य, सफलता और सुख-समृद्धि का वास होता है।
शहर अनुसार सूर्य उदय का समय