फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chhath Puja 2024: छठ पूजा पर क्यों दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्घ्य? जानिए इसके पीछे की मान्यता

Tue, 05 Nov 2024 01:59 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हिंदू धर्म में उगते हुए सूर्य को तो हर कोई जल देता है, लेकिन छठ पूजा के दौरान तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है। आइए जानते हैं कि छठ पूजा पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे क्या मान्यता है। 
विज्ञापन
1 of 5
Chhath puja 2024 - फोटो : freepik
Chhath Puja 2024: छठ महापर्व खासतौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। चार दिवसीय यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है। यह पर्व दीपावली के कुछ दिन बाद आता है। हर साल छठ पूजा का आरंभ कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से हो जाता है और सप्तमी तिथि पर इसका समापन होता है। पहले दिन नहाय-खाय की परंपरा के साथ इस पर्व की शुरुआत होती है और दूसरे दिन खरना की रस्म पूरी की जाती है। छठ पूजा के तीसरे दिन यानी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसका बाद चौथे दिन सप्तमी तिथि को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन हो जाता है। 

 
विज्ञापन

2 of 5
Chhath puja 2024 - फोटो : freepik
हिंदू धर्म में उगते हुए सूर्य को तो हर कोई जल या अर्घ्य देता है, लेकिन छठ पूजा के दौरान तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है। क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे क्या मान्यता है? आइए हम आपको बताते हैं कि छठ पूजा पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे क्या मान्यता है। 
 
विज्ञापन

3 of 5
Chhath puja 2024 - फोटो : freepik
छठ पर्व के 4 दिन
छठ पूजा- पहला दिन, 5 नवंबर 2024- नहाय खाय
छठ पूजा- दूसरा दिन, 6 नवंबर 2024- खरना
छठ पूजा- तीसरा दिन, 7 नवंबर 2024- डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य
छठ पूजा- चौथा दिन, 8 नवंबर 2024- उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण

4 of 5
Chhath puja 2024 - फोटो : freepik
क्या दिया जाता है डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य?
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन शाम के समय किसी तालाब या नदी में खड़े होकर व्रती डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। इसके पीछे यह मान्यता है कि डूबते समय सूर्य देव अपनी दूसरी पत्नी प्रत्यूषा के साथ में होते हैं। इस समय अर्घ्य देने से जीवन में चल रही हर समस्या दूर हो जाती है और सभी मनोकामना पूर्ण होती है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
Chhath puja 2024 - फोटो : freepik
डूबते सूरज को अर्घ्य देने का मुख्य कारण यह बताया जाता है कि सूरज का ढलना जीवन के उस चरण को दर्शाता है, जब व्यक्ति की मेहनत और तपस्या के फल प्राप्ति का समय आता है। डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में संतुलन, शक्ति और ऊर्जा बनी रहती है। डूबते सूर्य को अर्घ्य देना यह दर्शाता है कि जीवन में हर उत्थान के बाद पतन होता है, और हर पतन के बाद एक नया सवेरा होता है।
 

Chhath Puja 2024: पहली बार करने जा रहे हैं छठ पूजा, तो इन बातों का रखें ध्यान

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):  ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें