चार दिनों तक चलने वाले सूर्य उपासना का त्योहार छठ 18 नवंबर से आरंभ हो रहे हैं। छठ पर्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार दीवाली के बाद कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि पर मनाया जाता है। यह पर्व चार दिनों तक चलता है जिसकी शुरुआत नहाय खाय से होती है जोकि 18 नवंबर से प्रारंभ होकर 21 नवंबर तक चलेगा। छठ पूजा को सूर्य षष्टी, छठ माई पूजन, छठी माई.. आदि नामों से भी जाना जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और नेपाल में मनाया जाता है। 4 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में हर दिन का अपना महत्व होता है।
पहला दिन (नहाय खाय) - 18 नवंबर
छठ पूजा का पर्व नहाय खाय के साथ कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से आरंभ हो जाएगा। छठ के पहले दिन व्रती महिलाएं नदी या तालाब में स्नान करके छठ व्रत करने का संकल्प लेते हैं। इस व्रत के दिन लौकी और सरसों का साग खाने का बड़ा महत्व है।
दूसरा दिन (खरना) - 19 नवंबर
कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि छठ पूजा का दूसरा दिन होता है। दूसरे दिन खरना खाया जाता है। व्रती महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर शाम के समय भोजन करती हैं। छठ पर्व पर इस दिन शाम के समय चावल और गुड़ का प्रसाद और घी लगी हुई रोटी को प्रसाद के रूप में बांटी जाती है।
तीसरा दिन (संध्याकालीन अर्घ्य) - 20 नवंबर
छठ पर्व का मुख्य त्योहार 20 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ माई से संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
चौथा दिन (प्रात:कालीन अर्घ्य) - 21 नवंबर
फिर कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर सुबह उगते हुए सूर्य को पानी में खड़े होकर अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देने के बाद छठ का व्रत रखने वाली महिलाएं सात बार परिक्रमा करती है और अंत में प्रसाद खाकर व्रत का पारण करती हैं।