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Chaitra Navratri 2024: जानिए नवरात्रि पर कलश स्थापना और मां दुर्गा की पूजा-आराधना के क्या हैं नियम

Sun, 07 Apr 2024 10:53 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

नवरात्रि पर बताए गए नियमों को अगर ध्यान में रखते हुए देवी दुर्गा की पूजा औप उपासना की जाए तो इससे पूजा में ध्यान भी लगता है और पूजा के फल में वृद्धि होती है।
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चैत्र नवरात्रि पर करें इन नियमों का पालन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Chaitra Navratri 2024:  हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार का विशेष महत्व होता है। चैत्र नवरात्रि हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ हो जाती है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि व्रत 9 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं जो 17 अप्रैल को समाप्त होंगे। नवरात्रि पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों में व्रत रखने वालों के लिए कुछ नियम होते हैं। नवरात्रि पर बताए गए नियमों को अगर ध्यान में रखते हुए देवी दुर्गा की पूजा औप उपासना की जाए तो इससे पूजा में ध्यान भी लगता है और पूजा के फल में वृद्धि होती है।
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पूजा की सही दिशा
प्रज्ञा का दिशा क्षेत्र उत्तर-पूर्व पूजा करने के लिए आदर्श स्थान हैं। यहाँ पूजा करने से अच्छा प्रभाव मिलता हैं, शुभ फलों में वृद्धि होती है।

सात्विक रंगों का प्रयोग
नवरात्रि के दिनों में जिस कमरे में आप माता का पूजन कर रहे हैं वह कक्ष साफ़-सुथरा हो,उसकी दीवारें हल्के पीले, गुलाबी ,हरे या बैंगनी जैसे सात्विक रंग की हो तो अच्छा है,क्योंकि ये रंग आध्यात्मिक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते है।

कलश रखने की दिशा
कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश में सभी ग्रह,नक्षत्रों एवं तीर्थों का वास होता है। इनके आलावा ब्रह्मा,विष्णु,रूद्र,सभी नदियों,सागरों,सरोवरों एवं तेतीस कोटि देवी-देवता कलश में विराजमान होते हैं। वास्तु के अनुसार ईशान कोण(उत्तर-पूर्व)जल एवं ईश्वर का स्थान माना गया है और यहां सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा  रहती है। 
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शुभ रहेगी यह दिशा
 देवी मां का क्षेत्र दक्षिण और दक्षिण पूर्व दिशा माना गया है इसलिए यह ध्यान रहे कि पूजा करते समय आराधक का मुख दक्षिण या पूर्व में ही रहे। शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाने वाली पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है एवं दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से आराधक को शांति अनुभव होती है।

प्रवेशद्वार पर बंदनवार
देवी माँ की पूजा-अनुष्ठान के दौरान घर के प्रवेश द्धार पर आम या अशोक के ताज़े हरे पत्तों की बंदनवार लगाईं जाती है।ऐसा करने के पीछे मान्यता यह है कि इससे घर में नकारात्मक या बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। 

आग्नेय कोण में हो दीपक
नवरात्रि के समय देवी माँ की पूजा में शुद्ध देसी घी का अखंड दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है,नकारात्मक ऊर्जाएं नष्ट होती हैं एवं इससे आस-पास का वातावरण शुद्ध और सुकून भरा हो जाता है। दीपक को पूजा स्थल के आग्नेय यानि दक्षिण-पूर्व में रखना शुभ होता है क्योंकि यह दिशा अग्नितत्व की दिशा मानी गई है।

मां को प्रिय हैं लाल रंगों का प्रयोग
मां दुर्गा को लाल रंग अत्याधिक प्रिय है। लाल रंग को वास्तु में भी शक्ति एवं शौर्य का प्रतीक माना गया है इसलिए देवी को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, श्रृंगार की वस्तुएं एवं पुष्प यथासंभव लाल रंग के ही होने चाहिए। 
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