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Chaitra Navratri 2023: शुरू होने वाली है नवरात्रि, मनोकामना पूर्ति के लिए रोजाना करें मां अंबे की ये आरती

Mon, 20 Mar 2023 10:15 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Maa Durga Aarti Lyrics: नवरात्रि में रोजाना पूजा के दौरान मां दुर्गा की आरती की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान रोजाना मां दुर्गा की आरती करने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
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मां दुर्गा की आरती - फोटो : iStock
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विस्तार
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Maa Durga Aarti Lyrics: हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस साल नवदुर्गा की उपासना का ये पावन पर्व 22 मार्च 2023 से शुरू हो रहा है। नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना की जाती है और मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में जगत जननी मां जगदंबे की विधि-विधान से पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है। नवरात्रि में मां दुर्गा के प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ के साथ ही उनके प्रिय पकवानों का भोग भी लगाया जाता है, ताकि माता रानी प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाओं को पूरा कर दें। इसके अलावा रोजाना पूजा के दौरान मां दुर्गा की आरती की जाती है। नवरात्रि के दौरान रोजाना मां दुर्गा की आरती करने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। मां दुर्गा की आरती इस प्रकार है -

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मां दुर्गा की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी

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