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8 सितंबर को भौम प्रदोष व्रत, जानिए तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Sun, 06 Sep 2026 08:49 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 08 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 9 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर खत्म होगी।
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भौम प्रदोष व्रत - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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हिंदू धर्म में हर एक तिथि का विशेष महत्व होता है। हर तिथि के अलग-अलग देवी-देवता होते हैं। सितंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत मंगलवार को है। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व होता है। मंगलवार के दिन जब प्रदोष व्रत रखा जाता है तो उसे भौम प्रदोष के नाम से जाना जाता है। प्रदोष व्रत में भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती की पूजा का विधान होता है। इसमें भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करने का विधान होता है। इस वर्ष प्रदोष काल के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं भौम प्रदोष व्रत के बारे में विस्तार से.
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भौम प्रदोष व्रत 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 08 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 9 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर खत्म होगी। ऐसे में प्रदोष काल 8 सितंबर को पड़ेगा और इस दिन व्रत रखा जाएगा। मंगलवार के दिन प्रदोष काल 8 सितंबर है। 

पूजा शुभ मुहूर्त 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, 8 सितंबर को भगवान शिव की पूजा का समय 6 बजकर 35 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इसमें भवगान शिव का गंगाजल, दूध, बेलपत्र, फल-फूल और बेलपत्र से अभिषेक करें ऊं नम: शिवाय मंत्रों का जाप करें। इस दिन ब्रह्रामुहूर्त सुबह 4 बजकर 31 मिनट से लेकर 5 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगा और निशिता काल रात 11 बजकर 56 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। 
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भौम प्रदोष पर शुभ योग
इस बार भौम प्रदोष पर तीन तरह का शुभ योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग, परिघ योग और शिव योग। 
परिधा योग- सुबह से रात 12 बजकर 40 मिनट तक फिर शिव योग।
सर्वार्थ सिद्धि योग- 8 सितंबर शाम 4 बजकर 39 मिनट से 9 सितंबर सुबह 6 बजकर 3 मिनट तक।
पुष्य नक्षत्र- सुबह से शाम 4 बजकर 39 मिनट तक।

पूजा विधि
- सबसे पहले प्रदोष काल में स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनें।
- शिवलिंग पर जल, गंगाजल और दूध से अभिषेक करें। 
- इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, सफेद, दूथ और अक्षत अर्पित करें। 
- दीपक जलाकर शिव आरती करें और ऊं नम: शिवाय का जाप करें। 
- इस दिन वाद-विवाद से बचें, क्रोध और तामसिक भोजन करने से बचें। 

प्रदोष व्रत का महत्व
- प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है।
- इस व्रत को रखने से संकट दूर होते हैं और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
- सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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