Bhai Dooj 2022: हिंदू पंचांग के अनुसार भाई दूज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।
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Bhai Dooj 2022: रक्षाबंधन की तरह भाई दूज का त्योहार भी भाई-बहन के सुंदर रिश्ते, प्यार और स्नेह का प्रतीक है। दिवाली के बाद भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाई दूज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भाई दूज को देश के अलग-अगल हिस्सों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है। भाई दूज को भैया दूज, भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया भी कहते हैं। भाई दूज पर बहनें अपने भाईयों को तिलक लगाकर आरती उतारती हैं और उनकी लंबी आयु, सुख-समृद्धि और जीवन में वैभव की कामना करती हैं। इसके बाद भाई अपने बहनों को उपहार देते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाई दूज पर यमराज अपनी बहन यमुना के आमंत्रण पर उनके घर भोजन ग्रहण करने आते हैं। ऐसे में इस दिन मृत्यु के देवता यमराज और यमुना की पूजा करने का विधान है।
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भाई दूज तिथि और शुभ मुहूर्त 2022
इस बार भाई दूज का पर्व 27 अक्तूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार भाई दूज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आता है। इस वर्ष भाई दूज पर भाई के माथे पर तिलक करने का शुभ मुहूर्त 27 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
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भाई दूज पूजा विधि
- भाई दूज पर शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए बहनें भाई के तिलक करने और आरती के लिए पूजा की थाल तैयार करती हैं।
- पूजा की थाल में कुमकुम,अक्षत, चंदन, जल, मिठाई, फल और फूल आदि सामग्री की जरूरत होती है।
- भाई के माथे पर तिलक करने के लिए पूर्व दिशा में भाई को चौकी पर बैठाया जाता है।
- इसके बाद भाई के सिर पर कपड़े का टुकड़ा रखते हुए शुभ मुहूर्त में बहनें तिलक करें।
- तिलक लगाने के बाद भाई को मिठाई खिलाएं और आरती उतारें।
- आरती और तिलक के बाद भाई बहनों को उपहार में कुछ चीजें भेंट करें और हमेशा रक्षा करने का वचन दें।
भाई दूज पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार भाई दूज के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के बार बुलाने पर उनके घर गए थे और वहां पर भोजन किया था। इसी के बाद से हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भाई दूज की परंपरा शुरू हुई। दरअसल यमराज अपने काम में व्यस्त रहने के कारण यमुना के बार-बार घर पर आकर खाने के निमंत्रण को टाल जाते थें। जब यमराज यमुना के घर पहुंचे तब बहन यमुना भाई यमराज के माथे पर तिलक लगाते हुए उनकी आरती उतारती हैं और भोजन करते हुए भाई के खुशहाल जीवन की कामना की। इसके बाद भाई यमराज ने बहन को वरदान देते हुए कहा जो हर वर्ष इस तिथि पर घर आकर बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाएं उसके जीवन से डर खत्म हो जाएगा। तभी से भाई दूज पर्व की शुरुआत हुई। मान्यताओं के अनुसार इस दिन यमुना नदी में स्नान का विशेष महत्व होता है।