- भड़ली नवमी को भड़रिया नौमी, भड़ल्या नवमी, भढली नवमी, भड़ली नवमी, भादरिया नवमी, भदरिया नवमी, कन्दर्प नवमी एवं बदरिया नवमी आदि नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि पर नवरात्रि खत्म हो जाती है। भड़ली नवमी में अबूझ मुहूर्त होता है। इस तिथि को बगैर पंचांग को देखे विवाह से लेकर कोई मांगलिक कार्य किये जा सकते हैं।
- भड़ली नवमी पर गुप्त नवरात्रि की अंतिम तिथि होने के कारण भगवन गणेश, भगवान शिव और माता दुर्गा की विशेष रूप से पूजा-आराधना करने का महत्व होता है।
- भड़ली नवमी तिथि पर ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जरूरमंदों और गरीबों को धन, खाना, अन्न, कपड़े, छाता आदि का दान करना बहुत ही शुभ होता है।
- भड़ली नवमी तिथि पर सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और सूर्यदेव को अर्ध्य देकर भगवान गणेश की पूजा करें। पूजा के दौरान भगवान गणपति को दूर्वा और लड्डू अर्पित करें। नए वस्त्र और माला अर्पित करते हुए ऊं गं गणेशाय नम: मंत्र का जाप करें।
-भड़ली नवमी तिथि पर मंदिर जाकर भववान शिव के दर्शन करें और शिवलिंग पर जल अर्पित करें। शिवलिंग पर जलाभिषेक के दौरान बिल्वपत्र, धतूरा, फूल, भस्म, आक और चंदन अर्पित करें।
- भड़ली नवमी तिथि पर मां दुर्गा की विशेष पूजा-आराधना करने का महत्व होता है। नवमी तिथि पर माता को लाल चुनरी अर्पित करते हुए छोटी कन्याओं को भोजन करवाएं और उपहार दें।
भड़ली नवमी का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में भड़ली नवमी का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इस तिथि को अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में रखा जाता है, अर्थात इस दिन किसी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। यह पावन तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों के विवाह का उपयुक्त मुहूर्त नहीं बन पाता, वे भड़ली नवमी के दिन विवाह कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन संपन्न हुआ विवाह वैवाहिक जीवन में सुख, सौभाग्य और स्थिरता लेकर आता है।
भड़ली नवमी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसके बाद देवशयनी एकादशी आती है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और उसी के साथ चातुर्मास का आरंभ हो जाता है। चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। इसलिए भड़ली नवमी को इन शुभ कार्यों के लिए अंतिम महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा, हवन और मंत्र-जप करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा से घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और सकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहता है।
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