फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Basant Panchami 2025: जानिए कैसे हुआ देवी सरस्वती का प्राकट्य ? क्यों है वसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व ?

Sat, 01 Feb 2025 01:20 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Basant Panchami 2025: देवी सरस्वती का स्वरूप अत्यंत दिव्य और सौम्य बताया गया है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं, जो ज्ञान और पवित्रता का प्रतीक है। उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वरद मुद्रा में होता है।
विज्ञापन
Basant Panchami 2025: मां सरस्वती को संगीत, ज्ञान और कला की देवी माना जाता है। - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Basant Panchami 2025: सनातन धर्म में वसंत पंचमी एक अत्यंत पावन पर्व है, जो ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी सरस्वती को समर्पित है। इस दिन देवी सरस्वती की आराधना करने से बुद्धि, विवेक और सृजनात्मकता का विकास होता है। इसके अलावा इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है, जिसे शुभ, ज्ञानवर्धक और सौभाग्यशाली माना गया है।

विज्ञापन


देवी सरस्वती की उत्पत्ति
पुराणों में वर्णित है कि जब ब्रह्मांड की रचना हुई, तब संसार में केवल अज्ञान और अंधकार था। भगवान ब्रह्मा ने जब सृष्टि की संरचना की तो उन्होंने एक दिव्य शक्ति की रचना की, जिसने ब्रह्मांड को ज्ञान और प्रकाश से भर दिया। यही शक्ति सरस्वती थीं, जो ज्ञान, विद्या और संगीत की देवी बनीं। शास्त्रों में इन्हें 'ब्रह्मस्वरूपिणी' कहा गया है।

Basant Panchami 2025: वसंत पंचमी के दिन गलती से भी न करें ये काम, नाराज हो सकती हैं मां सरस्वती
विज्ञापन


देवी सरस्वती का स्वरूप
देवी सरस्वती का स्वरूप अत्यंत दिव्य और सौम्य बताया गया है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं, जो ज्ञान और पवित्रता का प्रतीक है। उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वरद मुद्रा में होता है।

वीणा – संगीत और कला का प्रतीक
पुस्तक – ज्ञान और विद्या का प्रतीक
अक्षमाला – ध्यान और तप का प्रतीक
वरद मुद्रा – भक्तों को आशीर्वाद देने का संकेत

वाग्देवी स्वरूपा सरस्वती की पूजा से वाणी में मधुरता आती है, विद्या में वृद्धि होती है और बुद्धि का विकास होता है।

Basant Panchami 2025: इन चीजों के बिना अधूरी है वसंत पंचमी की पूजा, यहां जानें सम्पूर्ण सामग्री
विज्ञापन


वसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व
वसंत पंचमी पर पीले रंग को अत्यंत शुभ और सौभाग्यशाली माना जाता है। यह रंग देवी सरस्वती का प्रिय माना गया है जो ज्ञान, ऊर्जा, उत्साह, तेजस्विता एवं सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन विशेष रूप से पीले वस्त्र धारण करने, पीले पुष्प अर्पित करने और पीले रंग के भोजन का सेवन करने की परंपरा है। पीला रंग न केवल देवी सरस्वती की कृपा को आकर्षित करता है, बल्कि यह मानसिक शांति और आत्मिक बल को भी बढ़ाता है। पीला रंग सूर्य के तेज, बुद्धि के विकास और आनंद के संचार का प्रतीक माना जाता है।

Basant Panchami: शिव और सिद्ध योग में 2 फरवरी को मनाई जाएगी वसंत पंचमी, इस दिन करें ये अचूक उपाय

इसके अलावा, पीला रंग समृद्धि और ज्ञान का भी प्रतीक है। मान्यता है कि पीले वस्त्र धारण करने से आत्मिक शुद्धता बढ़ती है और मन शांत रहता है। यह रंग धार्मिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। वसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनने, केसर मिश्रित खीर, हलवा या अन्य पीले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। पीला रंग सौभाग्य और आनंद का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि वसंत पंचमी के अवसर पर घरों, मंदिरों और विद्यालयों में पीले पुष्पों से सजावट की जाती है। इस दिन देवी सरस्वती की मूर्ति और वेदी को भी पीले रंग से सुसज्जित किया जाता है।  

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें