22 अगस्त को बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। मुस्लिम समुदाय के लिए बकरीद पर्व का विशेष महत्व होता है। बकरीद जिसे ईद-उल- जुहा के नाम से भी जाना जाता है त्याग और बलिदान का पर्व है। इस खास मौके पर इल्लाम धर्म को मानने वाले अनुयायी खुदा की इबादत करते हैं और कुर्बानी देते हैं।
इस्लाम धर्म का खास त्यौहार ईद-उल-जुहा दुनिया भर में मनाया जाता है। इसे बकरीद के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन धार्मिक मर्यादाओं के अनुसार बकरे की कुर्बानी दी जाती है। ईद-उल-जुहा का त्योहार रमजान के पवित्र महीने के खत्म होने के लगभग 70 दिनों के बाद आता है।
क्यों देते हैं कुर्बानी
बकरीद का पर्व कुर्बानी के लिए मनाया जाता है। पैगंबर हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने चाहते थे उन्होंने इसके लिए हजरत इब्राहिम के प्रिय बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने के लिए कहा। हजरत इब्राहिम अल्लाह के आदेश को पूरा करने का निर्णय किया और अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए। बेटे की कुर्बानी देने से पहले उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और बेटे की गर्दन पर चाकू चला दिया। जब आंखो से पट्टी हटाई तो बेटे की जगह बेदी पर कटा हुआ भेंड़ जैसा जानवर पाया। इसी के बाद अल्लाह को कुर्बानी देने की प्रथा शुरू हुई।