अक्षय तृतीया का पावन पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है।लोकभाषा में इसे आखातीज या वैशाख तीज भी कहा जाता है। यह पर्व इस बार 19 अप्रैल रविवार को है। त्रेता और सतयुग का आरम्भ भी इसी तिथि को हुआ था,इसलिए इसे कृतयुगादि तृतीया भी कहते हैं।भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन स्नान,दान,जप,होम,स्वाध्याय, तर्पण आदि जो भी कर्म किए जाते हैं,वे सब अक्षय हो जाते हैं।यह तिथि सम्पूर्ण पापों का नाश करने वाली एवं सभी सुखों को प्रदान करने वाली मानी गई है।इस तिथि की अधिष्ठात्री देवी पार्वती हैं।तृतीया तिथि को पार्वती जी ने अमोघ फल देने की सामर्थ्य का आशीर्वाद दिया था।उस आशीर्वाद के प्रभाव से इस तिथि को किया गया कोई भी कार्य निष्फल नहीं होता। इस दिन से जुड़ी अनेक पौराणिक घटनाएं इस पर्व के महत्व को और भी विशेष बनाती हैं।
महाभारत युद्ध की समाप्ति का दिन
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत का भीषण युद्ध अक्षय तृतीया के दिन समाप्त हुआ था। यह दिन धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक माना जाता है। इसलिए यह तिथि जीवन में सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
भगवान विष्णु के अवतारों का अवतरण
अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के कई महत्वपूर्ण अवतारों का प्राकट्य हुआ था। नर-नारायण, हयग्रीव और भगवान परशुराम का अवतरण इसी तिथि को हुआ माना जाता है। विशेष रूप से भगवान परशुराम के जन्म के कारण इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है। इन अवतारों का उद्देश्य धर्म की स्थापना और अधर्म का विनाश करना था, जो इस दिन की महत्ता को और बढ़ाता है।
ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का प्राकट्य
धार्मिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इसी दिन हुआ था। ‘अक्षय’ शब्द स्वयं इस दिन के महत्व को दर्शाता है, जो अनंत और अविनाशी फल का प्रतीक है। इस कारण यह तिथि विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की परंपरा
उत्तराखंड में स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनाथ धाम के कपाट अक्षय तृतीया के दिन ही खोले जाते हैं। शीतकाल में बंद रहने वाले मंदिर के द्वार इस शुभ तिथि पर पुनः खुलते हैं, जिससे चारधाम यात्रा का आरंभ होता है। यह परंपरा इस पर्व को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
चारधाम यात्रा का शुभारंभ
अक्षय तृतीया के दिन से ही चारधाम यात्रा का शुभारंभ माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन से अपने धार्मिक यात्रा की शुरुआत करते हैं। यह दिन यात्रा, नए कार्यों और शुभ शुरुआत के लिए अत्यंत मंगलकारी माना गया है।
श्री बांके बिहारी मंदिर में चरण दर्शन का महत्व
वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मंदिर में वर्ष भर भगवान के चरण वस्त्रों से ढके रहते हैं, लेकिन अक्षय तृतीया के दिन भक्तों को चरण दर्शन का विशेष अवसर मिलता है। यह दर्शन अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी माना जाता है, जिसके लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।