Aja Ekadashi 2025: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत महत्व माना गया है। यह दिन भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित होता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य अपने पिछले जन्मों के पापों से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति करता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। अजा एकादशी की महिमा का वर्णन पद्म पुराण और अन्य ग्रंथों में मिलता है, जिसमें कहा गया है कि इस दिन व्रत करने वाला व्यक्ति सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर परम शांति प्राप्त करता है। इस दिन भक्तजनों द्वारा भगवान विष्णु की पूजा, भजन-कीर्तन और कथा श्रवण से मन को शुद्धि और शांति मिलती है। अजा एकादशी का व्रत न केवल पापों का क्षय करता है, बल्कि जीवन को धर्म, सत्य और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करने का दिव्य अवसर प्रदान करता है। पौराणिक मान्यता है कि अजा एकादशी पर तुलसी से जुड़े उपाय करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में हर प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
1. तुलसी को जल अर्पित करना
अजा एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद तुलसी माता को गंगाजल मिलाकर शुद्ध जल अर्पित करें। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
2. तुलसी के पौधे में दीपक जलाना
शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाना विशेष फलदायी होता है। यह उपाय घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक वातावरण का निर्माण करता है और धन की वृद्धि में सहायक होता है।
3. तुलसी दल से भगवान विष्णु का पूजन
अजा एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी दल (पत्ते) अर्पित करना अति शुभ माना गया है। यह उपाय करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होकर भक्तों को पापों से मुक्ति और मोक्ष का आशीर्वाद देते हैं।
4. तुलसी के नीचे मंत्र जाप
अजा एकादशी के दिन तुलसी के नीचे बैठकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का जप करें। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है, बच्चों के जीवन में खुशहाली बनी रहती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
5. तुलसी माला धारण करना
इस दिन तुलसी की माला पहनकर भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करने से पुण्य फल मिलता है। यह उपाय भक्त को नकारात्मक विचारों से दूर रखता है और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।
6. तुलसी से बने भोग का अर्पण
अजा एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी दल से सुसज्जित भोग अर्पित करें। मान्यता है कि तुलसी सहित अर्पित किया गया भोग श्रीहरि को प्रिय होता है और इससे घर में अन्न-धन की वृद्धि होती है।