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Ahoi Ashtami 2024: अहोई अष्टमी व्रत में तारों को देखकर क्यों खोलते हैं व्रत?

Mon, 21 Oct 2024 06:59 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत में माता पार्वती के अहोई रूप की पूजा की जाती है। इसके बाद तारों को देखकर अर्घ्य देने के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं।
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अहोई अष्टमी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Ahoi Ashtami 2024 Date And Time: अहोई अष्टमी का व्रत हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और तरक्की के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत काफी कठिन और महत्वपूर्ण माना जाता है। अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत में माता पार्वती के अहोई रूप की पूजा की जाती है। इसके बाद तारों को देखकर अर्घ्य देने के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं। आइए जानते हैं अहोई अष्टमी पर तारा को देखकर व्रत क्यों खोला जाता है। 

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अहोई अष्टमी की तिथि 
अहोई अष्टमी तिथि आरंभ: 24 अक्तूबर, गुरुवार, रात्रि 01:18 मिनट पर
अहोई अष्टमी तिथि समाप्त: 25 अक्तूबर, शुक्रवार, रात्रि 01: 58 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत गुरुवार 24 अक्तूबर 2024 को रखा जाएगा। 

अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त 
अहोई अष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त: सायं 05: 42 से  सायं 06: 59 मिनट तक 
पूजा करने के लिए कुल अवधि 1 घंटा 17 मिनट 

अहोई अष्टमी पर क्यों देते हैं तारों को अर्घ्य 
करवा चौथ के दिन लोग चंद्रमा को देखते हैं और अर्घ्य देते हैं, जबकि अहोई अष्टमी के दिन तारों को देखने और अर्घ्य देने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि यदि वह अहोई अष्टमी के दिन अनगिनत तारों के दर्शन और पूजा करेंगे , तो पूजा करने से कुल में अनगिनत संतान होती है। इस व्रत में माताएं पूजा के दौरान माता पार्वती से प्रार्थना करती हैं कि जैसे आकाश में तारे हमेशा चमकते रहते हैं, वैसे ही हमारे परिवार में जन्म लेने वाले बच्चे का भविष्य भी चमकता रहे। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि आकाश के सभी तारे अहोई माता के वंशज हैं। इसलिए अहोई का व्रत तब तक पूरा नहीं माना जाता जब तक तारों को अर्घ्य न दिया जाए।

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व
अहोई अष्टमी व्रत  के दिन महिलाएं बिना अन्न-जल ग्रहण किए व्रत का पालन करती हैं। इसके बाद शाम को तारों को देखकर और अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि माता इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करें तो अहोई  माता उनके बच्चों को दीर्घायु और यश प्रदान करती हैं।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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