हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत में विधि-विधान, भक्ति और श्रद्धा भाव से व्रत रखते हुए भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस तिथि पर भगवान शिव की पूजा करने से जीवन से दुख, दरिद्रता, बाधाएं दूर होती हैं। जब गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत आता है तो यह विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। गुरु प्रदोष व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती के साथ भगवान विष्णु की पूजा उपासना करने का खास महत्व होता है। इस बार गुरु प्रदोष व्रत अधिकमास में पड़ने के कारण विशेष फलदायी माना जाता है क्योंकि अधिकमास में भगवान विष्णु की पूजा की होती है ऐसे में गुरु प्रदोष व्रत में भगवान शिव और विष्णु दोनों की उपासना करने से यह बहुत फलदायी माना जाता है। इस बार गुरु प्रदोष व्रत 28 मई को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं गुरु प्रदोष व्रत तिथि, महत्व और पूजा मुहूर्त के बारे में सबकुछ।
गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
अधिक मास प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दिन भोले भंडारी की आराधना करने से सभी तरह मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन पूरे दिन व्रत रखते हुए शाम से समय यानी प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान के साथ पूजा करने का विशेष महत्व होता है। प्रदोष व्रत में सुबह स्नान करके घर के पास स्थिति मंदिर जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें। इस दिन भगवान शिव पंचामृत, धूप और दीपक से आरती करें और भोग लगाए। इसके बाद भगवान शिव का आरती उतारें और लगातार शिवजी के मंत्रों का जाप करें। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में जरूर करें। प्रदोष काल का समय सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद का समय होता है।
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