फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

28 मई को अधिक मास गुरु प्रदोष व्रत का शुभ योग, जानिए पूजा शुभ मुहूर्त और महत्व

Tue, 26 May 2026 02:58 PM IST
Vinod Shukla धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं में प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से हर तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है। 
विज्ञापन
guru pradosh vrat 2026 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत में विधि-विधान, भक्ति और श्रद्धा भाव से व्रत रखते हुए  भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस तिथि पर भगवान शिव की पूजा करने से जीवन से दुख, दरिद्रता, बाधाएं दूर होती हैं। जब गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत आता है तो यह विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। गुरु प्रदोष व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती के साथ भगवान विष्णु की पूजा उपासना करने का खास महत्व होता है। इस बार गुरु प्रदोष व्रत अधिकमास में पड़ने के कारण विशेष फलदायी माना जाता है क्योंकि अधिकमास में भगवान विष्णु की पूजा की होती है ऐसे में गुरु प्रदोष व्रत में भगवान शिव और विष्णु दोनों की उपासना करने से यह बहुत फलदायी माना जाता है। इस बार गुरु प्रदोष व्रत 28 मई को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं गुरु प्रदोष व्रत तिथि, महत्व और पूजा मुहूर्त के बारे में सबकुछ।

विज्ञापन


गुरु प्रदोष व्रत 2026 तिथि 
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 28 मई 2026 को सुबह 07 बजकर 57 मिनट से शुरू होगी और इस त्रयोदशी तिथि का समापन 29 मई 2026 को सुबह 09 बजकर 51 मिनट पर होगा। ऐसे में अधिकमास गुरु प्रदोष व्रत 28 मई को मनाया जाएगा। 

गुरु प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त 
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करने का विधान होता है। प्रदोष काल का समय सूर्यास्त के बाद का समय होता है और इस दिन प्रदोष काल शाम 07 बजकर 12 मिनट से लेकर 09 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। ऐसे में इस दौरान पूजा-अर्चना का समय सबसे बढ़िया रहेगा। 

Ekadashi Kab Hai: कब है अधिकमास की एकादशी आज या कल ? जानिए पूजा विधि, महत्व और नियम

गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

विज्ञापन

हिंदू धर्म में गुरु प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। गुरुवार दिन जब प्रदोष व्रत आता है तो इस गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। गुरु प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष रूप से संतान, सुख, विवाह, करियर और आर्थिक तरक्की के लिए बहुत ही शुभ और लाभकारी माना जाता है। भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करने का विधान होता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर सबसे ज्यादा प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं ऐसे में इस समय उनकी पूजा करने से भक्तों की सभी तरह की मनोकामनाएं जल्द से जल्द पूरी हो जाती है। अधिकमास में पड़ने वाले प्रदोष व्रत को करने से ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। 

Padmini Ekadashi 2026: अधिकमास की पद्मिनी एकादशी आज, जानिए तिथि, पूजा शुभ मुहूर्त और महत्व

अधिक मास प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दिन भोले भंडारी की आराधना करने से सभी तरह मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन पूरे दिन व्रत रखते हुए शाम से समय यानी प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान के साथ पूजा करने का विशेष महत्व होता है। प्रदोष व्रत में सुबह स्नान करके घर के पास स्थिति मंदिर जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें। इस दिन भगवान शिव पंचामृत, धूप और दीपक से आरती करें और भोग लगाए। इसके बाद भगवान शिव का आरती उतारें और लगातार शिवजी के मंत्रों का जाप करें। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में जरूर करें। प्रदोष काल का समय सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद का समय होता है। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें