फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अचला सप्तमी 2021: जानिए क्यों खास हैं अचला सप्तमी, सूर्योपासना से श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब हुए रोग मुक्त

Wed, 17 Feb 2021 06:44 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
विज्ञापन
माघ मास के शुक्ल पक्ष की अचला सप्तमी को सूर्य उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

शास्त्रों के अनुसार सभी सप्तमी तिथियों में माघ मास के शुक्ल पक्ष की अचला सप्तमी को सूर्य उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। अचला सप्तमी को रथ सप्तमी, भानु सप्तमी और आरोग्य सप्तमी के नाम से भी जानते हैं। इस साल अचला सप्तमी 19 फरवरी (शुक्रवार) को है। मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव ने सबसे पहले विश्व को प्रकाशित किया था। अचला सप्तमी के दिन सूर्यदेव की आराधना का अक्षय फल मिलता है एवं सभी प्रकार के तापों से मुक्ति मिलती है। सूर्य नारायण अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और निरोग होने का आशीर्वाद देते हैं। भविष्य पुराण की मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने से सौभाग्य, सुंदरता और उत्तम संतान का वरदान मिलता है।

विज्ञापन

शाम्ब ने की उपासना-
इस सप्तमी से सम्बंधित कथा का उल्लेख भविष्य पुराण में मिलता है। कथा के अनुसार श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपने शारीरिक बल और सौष्ठव पर बहुत अधिक अभिमान हो गया था। अपने इसी अभिमान के मद में उन्होंने दुर्वासा ऋषि, जिनका शरीर तप से दुर्बल हो गया था, का अपमान कर दिया। शाम्ब की इस धृष्टता को देखकर उन्होंने शाम्ब को कुष्ठ होने का श्राप दे दिया। तब भगवान श्री कृष्ण ने शाम्ब को सूर्य भगवान की उपासना करने को कहा। शाम्ब ने आज्ञा मानकर सूर्य भगवान की आराधना आरम्भ कर दी जिसके फलस्वरूप उन्हें अपने कष्ट से मुक्ति मिल गई। इस सप्तमी को सूर्य भगवान की पूजा-अर्चना जो श्रद्धालु विधिवत तरीके से करते हैं उन्हें आरोग्य, अच्छी संतान, धन-ऐश्वर्य व मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार एक गणिका इन्दुमती ने वशिष्ठ मुनि के पास जाकर मुक्ति पाने का उपाय पूछा। मुनि ने कहा- ‘माघ मास की सप्तमी को अचला सप्तमी का व्रत करो।' गणिका ने मुनि के बताए अनुसार व्रत किया। इससे मिले पुण्य से जब उसने देह त्यागी, तब उसे इन्द्र ने अप्सराओं की नायिका बना दिया।
विज्ञापन

क्या हैं अर्घ्य और पूजा के नियम-
इस दिन प्रातः जल्दी उठकर किसी जलाशय, नदी अथवा घर में ही ताज़ा जल से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें लाल पुष्प, लाल चन्दन, तिल आदि डालकर 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मन्त्र का जप करते हुए सूर्य को अर्घ्य दें, अर्घ्य देते समय आपकी दृष्टि गिरते हुए जल में प्रतिबिंबित सूर्य की किरणों पर होनी चाहिए। तिल के तेल का दीपक इस दिन सूर्यनारायण के निमित्त अर्पित करें और संभव हो सके तो आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ भी करें। 

इस दिन अपाहिजों, गरीबों तथा ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरत की वस्तुएं देनी चाहिए। आज के दिन सूर्य उपासना करने वालों के लिए एक समय नमक रहित भोजन अथवा फलाहार करने का विधान है। पुराणों के अनुसार व्रती को नीले वस्त्र धारण नहीं करने चाहिएं अन्यथा पूजा निष्फल हो जाती है। पापों का हरण करने वाली इस रथ सप्तमी को भगवान सूर्य के निमित्त किया गया स्नान, दान, हवन, पूजा आदि सत्कर्म हज़ार गुना फलदायक हो जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार सूर्यनारायण का पूजन करने वाला व्यक्ति प्रज्ञा, मेधा तथा सभी समृद्धियों से संपन्न होता हुआ चिरंजीवी होता है।

यदि कोई व्यक्ति सूर्य की मानसिक आराधना भी करता है तो वह समस्त व्याधियों से रहित होकर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करता है।जिस प्रकार भगवान भास्कर देव को कोहरा स्पर्श नहीं कर पाता,उसी प्रकार सूर्यनारायण की किसी ना किसी रूप में पूजा करने वाले साधक को किसी भी प्रकार की परेशानिया स्पर्श नहीं कर पातीं।इस व्रत के प्रभाव से व्रती अपने अभीष्ट मनोरथ को प्राप्त करता है,व्यक्ति को अपने कल्याण के लिए सूर्यदेव की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें