आज तक हम अपने तन और मन को स्वस्थ तथा ऊर्जावान बनाये रखने के लिये योग अर्थात् शारीरिक आसन तथा मुद्राओं का सहारा लेते थे। इनके द्वारा अनेक तरह के रोगों से मुक्त तथा सम्पूर्ण आरोग्य भी हमें प्राप्त होता था, परन्तु वर्तमान की स्थिति कुछ और है। आज देखा गया है अनेक लोग इस तरह के योगाभ्यास करते हैं, लेकिन उनको भी सम्पूर्ण रूप से तन तथा मन की व्याधियों से मुक्ति नहीं मिलती है। अत: आज हमें एक ऐसा योग सीखना होगा जो हमारे तन और मन को फिर से सम्पूर्ण निरोगी बना दे।
तन से ज्यादा मन है बीमार
आज मानव शरीर की तुलना में मन से ज्यादा बीमार है। वह नकारात्मक सोच-सोच कर भी अपना सन्तुलन खराब कर लेता है। अगर योगासन के द्वारा हम रोगमुक्त हो भी गये तो भी हमारा कमजोर विचारों वाला मन इस स्वास्थ्य को ज्यादा समय चलने नहीं देगा। विज्ञान भी मानता है कि बहुत सी बीमारियां मनुष्य की व्यर्थ तथा बुरी सोच का परिणाम है। अगर सारा दिन मनुष्य अपना दिमाग लड़ाता रहे, उल्टी-सीधी बातें सोचता रहे तो होने वाला ब्रेन ट्यूमर इसी बुरी सोच के परिणाम स्वरूप सामने आता है। इस स्थिति में राजयोग एक सम्पूर्ण योग है जो हमारे शरीर और मन, बुद्धि को संयमित रखता है। इससे हमारे विचारों में सकारात्मकता आती है। सकारात्मक जीवनशैेली ही संभव है हर तरह की बीमारियों से छुटकारा दिलाने में, चाहे वो मन से सम्बन्धित हो या तन से सम्बन्धित।
क्यों जरूरी है राजयोग
हम अपने निजी जीवन में कई तरह के बदलाव चाहते हैं। हम अपनी कई कमजोरियों को छोड़ना चाहते हैं, जिससे हम तथा दूसरे दु:खी हैं, लेकिन चाहते हुए भी हम अपने स्वभाव को छोड़ नहीं पाते और इसी तरह छोटी-छोटी बातों में मनमुटाव, क्रोध तथा गृह-क्लेश जैसी स्थिति से हमारा जीवन अशांत होता चलता जाता है। जीवन यात्रा में कोई सुखद अनुभूति नहीं हो रही होती है, जीवन कष्टदायी हो गया है, ऐसा प्रतीत होने लगता है। अत: ऐसी स्थिति में राजयोग हमारे मन में बदलाव लाने में भावनात्मक रूप से सहायता करता है, हमारे विचारों का स्तर ऊंचा उठाता है और हम अपनी उन कमियों को बदल पाते है, जो हमें दु:खी करती थी।
1. तनाव से मुक्ति:
आज बड़े-बड़े डॉक्टर्स भी तनाव का स्थायी इलाज नहीं निकाल पाये हैं। जब इनकी सहायता ली जाती है, तो ऐसी दवाएं दी जाती है, जिससे दिमाग कुछ देर के लिये शान्त हो जाए लेकिन ये कोई स्थायी समाधान तो नहीं है। आज हम इस छोटे से सवाल को जाने कि हमें तनाव होता क्यों है? हम किसी एक बुरी या दु:खद घटना के बारे में बार-बार सोचते हैं तो यही बात बार-बार चिंतन करने के कारण तनाव का रूप ले लेती है। हम कई बार ये कोशिश भी करते हैं कि हमें इस बारे में कुछ भी नहीं सोचना, परन्तु कमजोर मन फिर-फिर उसी तरफ चला जाता है। फलस्वरूप, हमें तनाव हो जाता है। राजयोग के माध्यम से हमें सुखद विचारों को अपने मन में लाने की कला सिखायी जाती है और जब हमारा मन इन सुखद विचारों में रमण करता है, तो हमारा अन्तर्मन सुख-शांन्ति और आनन्द से भरपूर होता जाता है।
2.अनिद्रा से मुक्ति:
भागदौड़ भरी जिन्दगी में जितना आगे बढ़ते जा रहे है, उतना ही हमारे मन के विचार भी हमारे नियंत्रण से बाहर होते जा रहे है। इन्हीं अनियंत्रित विचारों के चलते जब हम सोने जाते हैं तो नींद नहीं आती है। जब तक विचारों की गति सामान्य नहीं होती तब तक नींद आ नहीं सकती तथा विचारों की गति सामान्य करना आज किसी को आता नहीं है। फलस्वरूप अनिद्रा का शिकार हो जाते हैं। इस विषय में राजयोग एक परम औषधि है। राजयोग के द्वारा हम अपने विचारों को दिशा देने की विधि सीखते है। जब अपने विचारों को एक सकारात्मक दिशा मिलती है, तो इन विचारों के द्वारा मिली शांति हमें गहरी नींद भी देती है और एक नई ऊर्जावान सुबह भी।
3. सम्बन्धों में मधुरता:
वर्तमान समय में एक बहुत बड़ी समस्या है कि हमारे पारिवारिक सम्बन्ध बिगड़ते जा रहे है, इन्सान का अहम भाव उसे कहीं भी, किसी भी बात में झुकने नहीं देता है। यही वजह है कि विचारों का टकराव ही सम्बन्धों में टकराव का रूप लेता जा रहा है लेकिन राजयोग के माध्यम से हमारे विचारों का स्तर बहुत ऊंचा होता जाता है। हम किसी भी छोटी-बड़ी बात में अपने रिश्तों को बहुत ही मधुरता के साथ प्राथमिकता देते हैं और यही प्राथमिकता हमारे सम्बन्धों को लम्बा जीवन देती है। इस मधुरता से जीवन में जो आनन्द भरता जाता है, उससे अहम् भाव खत्म होता जाता है।
4. निश्चिंतता:
राजयोगी जीवनशैली है ही सकारात्मक पद्धति पर आधारित। एक सामान्य व्यक्ति किसी भी बात को सही या गलत ढंग से सोच सकता है, लेकिन एक राजयोगी किसी भी बात के हर पहलू को देखेगा ही सकारात्मकता से और सकारात्मकता में कहीं भी चिंता, तनाव या परेशानी नहीं होती है। सकारात्मकता तो हमें हर समस्या के समय जिम्मेदारी के साथ चिंता, तनाव से दूर रख एक सहज समाधान देती है, तो फिर चिंता नहीं, अनिश्चितंता जीवन में आती है।
कैसे करें हम राजयोग:
सर्वप्रथम यह जान लेना जरूरी है कि हम यह कोई नया कार्य नहीं कर रहे हैं। हमारा योग हर समय किसी ना किसी व्यक्ति, वस्तु के साथ रहता ही है। योग का अर्थ है जुड़ना। हम किसी वस्तु के बारे में सोच रहे हैं या किसी व्यक्ति या मित्र-सम्बन्धी के बारे में तो उस समय हम मन से उसके साथ जुड़े ही होते है। अत: राजयोग में हम स्वंय के साथ तथा अपने सर्वश्रेष्ठ परमपिता परमात्मा के साथ जुड़ते हैं।