खेत में यह कहानी है एक संवेदनशील पिता के साफ दिमाग और दमदार इरादों की। रमाकांत मौर्या ने अपनी बड़ी बेटी का न केवल बाल विवाह रोका बल्कि अपनी तीनों बेटियों और दो बेटों को अच्छी शिक्षा दिलावाने के लिए हाड़तोड़ मेहनत की है।
एक छोटी दुकान और थोड़ी सी खेती के दम पर इस दम्पति ने अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अपने गांव-समाज से आने वाले हर दबाव को झेला है। अपने पांचों बच्चों को ठीक-ठीक शिक्षा दिलावाने की जिद का कारण रमाकांत के दिमाग में एकदम साफ है। लड़का और लड़की एकसमान हैं और उन्हें शिक्षा पाने का एक सा हक है। दूसरे, बाल विवाह से लड़के और लड़की, दोनों का ही जीवन खराब होता है और आने वाली संतान का भी। स्मार्ट बेटियां अभियान के तहत काम कर रही इंटरनेट साथी पुष्पा देवी ने इस वीडियो कथा को बनाकर अमर उजाला को भेजा है।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।