दुधवनियां गांव के रामसमुझ आर्य को अपने बड़े बेटे की शादी कच्ची उम्र में करने का काफी अफसोस है। लेकिन इस अफसोस ने ही उन्हें इस कदर कुरेदा कि फिर उन्होंने प्रण कर लिया कि अपने बाकी बच्चों की शादी वे किसी भी हालत में 21 या 18 साल से कम में नहीं करेंगे। और यह समझ उन्हें मिली गांव के ही कुछ समझदार और पढ़े-लिखे लोगों के साथ उठने-बैठने से। रामसमुझ की समझ अनुकरणीय है।
अपने समुदाय के दबाव में रामसमुझ ने बेटे की शादी 21 साल से पहले ही कर दी। और तब बेटा अपने पैरों पर खड़ा नहीं होने पाया था— इस बात का अफसोस पिता को आज भी सालता है। इस तकलीफ ने उनके संकल्प को एक खास तरह की मजबूती दी है। अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें जितने आर्थिक संसाधन चाहिए, उसके लिए औरों के खेतों में जाकर मजदूरी करने से भी रामसमुझ को गुरेज नहीं है।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।