बेटी की जिद को आखिरकार मां का साथ मिला। मां ने बेटी का दर्द समझा और उसे आगे पढ़ने देने के हालात बनाए। और यों श्रावस्ती के शाहपुर बरगदवा गांव की किरन डॉक्टर बनने के सपने को सच करने की राह पर आगे बढ़ती जा रही है।
चाय-किराने एक छोटी सी दुकान से घर की गाड़ी को आगे बढ़ाने वाले इस परिवार में किरन की बड़ी बहन की शादी तो कच्ची उम्र में ही हुई थी। अपनी बड़ी बहन की तकलीफों को किरन ने करीब से देखा-समझा था। माता-पिता दोनों ही उसकी शादी 12 साल की उम्र में करने वाले थे लेकिन अपने लिए अलग सपने देखने वाली किरन ने मां को राजी करके अपने आगे बढ़ने का सिलसिला रुकने न दिया। स्कूल का सफर 14 किमी का था लेकिन किरन के मजबूत इरादों की साइकिल बरसों बरस इस सफर को तय करती रही।
किरन की मां शांति देवी स्वीकारती हैं कि पहले तो वे यही चाहती थीं कि और बेटियों की तरह किरन की शादी भी जल्दी हो जाए ताकि उनके सिर से बोझ उतर जाय। लेकिन बेटी की आगे पढ़ने की जिद ने उनका दिल बदल दिया। वे भी मानती हैं कि आज के जमाने में लड़की का भी अपने पैरों पर खड़ा होना जरूरी है। स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी मालती देवी ने किरन और उसकी मां शांति देवी से बात करके यह वीडियो कथा बनाई है।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।