इलाहाबाद हाईकोर्ट अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के उस नियम की वैधानिकता की जांच करेगा, जिसके तहत कार्यकारी परिषद (ईसी) के दो-तिहाई बहुमत से किसी शिक्षक की सेवा समाप्त की जा सकती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के उस नियम की वैधानिकता की जांच करेगा, जिसके तहत कार्यकारी परिषद (ईसी) के दो-तिहाई बहुमत से किसी शिक्षक की सेवा समाप्त की जा सकती है। विवि से बर्खास्त डॉ.तंजीम फातिमा याचिका पर न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ 16 अप्रैल को दोपहर दो बजे सुनवाई करेगी।
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याची ने विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 40(3)(बी) को चुनौती दी है। याची की सेवा समाप्ति के खिलाफ यह कानूनी लड़ाई लंबे समय से चल रही है। इससे पहले भी अदालत ने हस्तक्षेप किया था पर 19 मई 2014 को कार्यकारी परिषद ने पुनः बहुमत से उनकी बर्खास्तगी के फैसले को दोहराया है।
अब याची ने बर्खास्तगी की इस प्रक्रिया की वैधानिकता की चुनौती दी है। याची का तर्क है कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करता है। यह प्रावधान शिक्षक को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं देता और न ही बहुमत से लिए गए निर्णय में बर्खास्तगी के ठोस कारण बताने की जरूरत भी नहीं होती। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि जब कोई निर्णय मतदान के जरिये होता है तो उसमें विस्तृत कारणों के बजाए प्रस्ताव स्वीकृत या अस्वीकृत होता है। लिहाजा, मामला विचारणीय है।