मासूम युग अपहरण और हत्या के मामले में सीआईडी 21 दिन के भीतर चालान पेश कर देगी। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटा लिए हैं। एफएसएल से कई रिपोर्ट बाद में आएंगी, जिन्हें अनुपूरक चालान के तौर पर बाद में पेश किया जा सकता है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीआईडी चालान पेश करने के साथ ही अदालत में अर्जी दाखिल करेगी, जिसमें इस केस की सुनवाई हर रोज हो सके।
अर्जी मंजूर हुई तो केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा। डीआईजी सीआईडी विनोद धवन ने कहा कि वरिष्ठ अफसरों के सहयोग और टीम की दिन-रात की मेहनत से युग हत्या के आरोप में तीनों को पकड़ा गया है। इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जाएगी। उन्होंने बताया कि अदालत में दरख्वास्त दी जाएगी कि इस मामले में डे टू डे सुनवाई हो ताकि आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलवाई जा सके।
ऐसे आए थे पकड़ में
नार्को टेस्ट के दौरान गुप्ता परिवार का नौकर बार-बार चंद्र शर्मा का नाम ले रहा था। सीआईडी को संदेह हो गया। न्यू शिमला चोरी मामले में जब तीनों आरोपियों का नाम सामने आया तो शक यकीन में बदल गया। तीनों के मोबाइल खंगाले गए। इस बीच विक्रांत बख्शी के मोबाइल से युग की एक क्लिप और फोटो बरामद हुए।
इसके बाद तेजिंद्र और चंद्र शर्मा को गिरफ्तार किया गया लेकिन इन्हें जमानत मिल गई। सीआईडी ने विक्रांत पर शिकंजा कसा तो उसने सारी बात बता दी। इसके बाद एक बार फिर तेजिंद्र और चंद्र को हिरासत में लिया गया। बाद में सीआईडी ने क्लस्टन टैंक के अंदर और बाहर से युग के अवशेष बरामद कर इस केस को सुलझा दिया।
कई बार टूटी सीआईडी की आस, पर मासूम के चेहरे ने दिया हौसला
मासूम युग की गुमशुदगी के रहस्य को सुलझाने औरआरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए डीआईजी सीआईडी की टीम ने रात-दिन एक किया। कई बार ऐसा भी हुआ, जब जांच अधिकारियों के हौसले पस्त हुए, कई बार कमजोर पड़े लेकिन हिम्मत नहीं हारी। इस स्थिति में हर बार उस चार साल के मासूम की फोटो देखकर यह प्रण करते रहे कि इसके पीछे जो भी हों, उन्हें पकड़कर ही दम लेंगे।
आखिरकार टीम ने कत्ल के तीनों आरोपियों को पकड़कर ही दम लिया। इन सबके पीछे एडीजीपी सीआईडी बीएनएस नेगी , डीआईजी सिक्योरिटी क्राइम रहे दलजीत ठाकुर का भी अहम रोल रहा है, जिन्होंने टीम के हौसले को कम नहीं होने दिया और हर संभव मदद दी।
डीआईजी (सीआईडी) विनोद धवन की निगरानी में युग मामले ने रफ्तार पकड़ी और यहीं से एक एक अनसुलझी कड़ी को जोड़कर मामले की तह तक पहुंचे। एसपी क्राइम अशोक कुमार, डीएसपी भूपेंद्र बरागटा, सब इंस्पेक्टर सुरेश कुमार, एएसआई
राजेश कुमार, एएसआई अनिल, हेडकांस्टेबल रवि, हेडकांस्टेबल उमेश्वर सिंह, कांस्टेबल दीपक (1102) के अलावा एफएसएल के डायरेक्टर डा. अरुण शर्मा, डा. जगजीत सिंह, डा. संजीव कुमार और डा. बी पटियाल ने क्राइम सीन विजिट में साइंटिफिक तरीके से सबूतों को एकत्रित कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
96 घंटे में चालान पेश करने का है रिकार्ड
डीआईजी विनोद धवन ने एक विदेशी महिला के साथ दुराचार और लूट के एक ऐसे केस को सुलझाया जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। मामला साल 2013 का है। मनाली घूमने यूएसए से एक विदेशी महिला आई। उसे अकेला देखकर तीन लोगों ने उसके साथ दुराचार किया और लूटपाट कर फरार हो गए।
मामला सामने आने के बाद 48 घंटों के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। देश के बहुचर्चित निर्भया कांड के बाद यह पहला मामला था जिसमें आरोपियों को 48 घंटे के भीतर पकड़ा और 96 घंटे में चालान पेश कर दिया गया। अदालत ने 6 महीने 12 दिन में आरोपियों को 20 साल की सजा सुनाई थी।
युग के घर पहुंचे धूमल, परिजनों को बंधाया ढांढस
पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेमकुमार धूमल ने सोमवार को राजधानी शिमला के रामबाजार स्थित युग गुप्ता के घर जाकर परिजनों को ढांढस बंधाया। प्रो. धूमल ने कहा कि मासूम युग के अपहरण और हत्याकांड ने प्रदेश के सभी वर्गों के लोगों को झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले का फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट में होना चाहिए। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
यह फैसला सिर्फ पीड़ित परिजनों ही नहीं समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर युग गुप्ता के पिता विनोद कुमार गुप्ता ने कहा कि आरोपी युवकों के परिजनों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। कोई और बच्चा इस तरह निर्मम हत्या का शिकार न बने, इसके लिए आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
इस अवसर पर स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज, भाजपा जिला अध्यक्ष संजय सूद, जिला मीडिया प्रभारी करण नंदा, पूर्व पार्षद जसविंद्र सिंह, संजीव शर्मा, दीपक शर्मा, मंजू सूद, बृजमोहन शर्मा, अश्वनी मिनौचा, राजेश शारदा और राजु ठाकुर सहित कई अन्य मौजूद रहे।
सीआईडी की जांच पर नगर निगम के मेयर ने उठाए सवाल
युग हत्याकांड में सीआईडी की जांच पर नगर निगम के मेयर संजय चौहान ने सवाल उठाए हैं। मेयर ने दावा किया है कि नगर निगम के भराड़ी टैंक में कोई अवशेष नहीं मिला है। जांच के दौरान सीआईडी को जो भी अवशेष मिले हैं, सब टैंक के बाहर मिले हैं। सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए मेयर ने कहा कि रुटीन के तहत भराड़ी टैंक की सफाई की गई है।
टैंक से सप्लाई होने वाले पानी के सैंपलों की जांच रिपोर्ट भी एक्सीलेंट पाई गई है। मेयर ने कहा कि नगर निगम के सहायक आयुक्त को इस पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। मेयर ने कहा कि मामले की जांच के लिए चार दिन का समय दिया गया था।
जांच प्रक्रिया के दौरान टैंक की सफाई करने वाले कर्मियों से लेकर अधिकारियों तक के बयान लिए जा रहे हैं, जिससे अधिक समय लग रहा है। रिपोर्ट सौंपने के लिए जांच अधिकारी ने दो दिन का समय और मांगा है। यदि जांच रिपोर्ट में नगर निगम के किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आई तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी।
मासूम की मौत पर राजनीति कर रही बीजेपी-कांग्रेस
मेयर संजय चौहान का कहना है कि मासूम युग की मौत पर बीजेपी और कांग्रेस राजनीति कर रही हैं। पुलिस की मौजूदगी में पब्लिक आफिस में जबरन घुसकर टेबल पर डांस करना निंदनीय है। इस प्रकरण में हर प्रकार की जांच के लिए नगर निगम तैयार है। लेकिन ओछी राजनीति नहीं की जानी चाहिए।
क्यों फैल रही अराजकता? जवाब दें सीएम
मेयर का कहना है कि शिमला सहित पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था चौपट हो गई है, पर सरकार गंभीर नहीं है। इस अराजकता को लेकर मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए। रविवार को शहर में दो-दो लाशें मिली हैं। अपहरण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 2013 में 49, 2014 में 39 और 2015 में 56 मामले सामने आए हैं, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
पुलिस लापरवाही न करती तो जिंदा होता युग
मेयर ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कहा कि अपहरण के आठ से दस दिन तक युग शहर में था और जिंदा था। शिमला पुलिस थोड़ी सी भी सतर्कता बरतती तो युग की जान बच सकती थी। युग के हत्यारे पहले भी दो बार गिरफ्तार हो चुके थे। बावजूद इसके दोषियों को पकड़ने में भारी लापरवाही बरती गई।
आरोपियों को ड्रग माफिया और राजनेताओं का संरक्षण
संजय चौहान ने कहा कि युग हत्या मामले में दोषियों को शिमला में सक्रिय ड्रग माफिया और कुछ राजनेताओं का संरक्षण प्राप्त है। दोषियों के पास इतना पैसा कैसे आया, बैंकों में लेन देन किसके साथ हुआ, केस दर्ज करने में समय क्यों लगा और पिछले मामलों में यह कैसे आसानी से छूट गए इसकी सीआईडी जांच की जानी चाहिए।
सुधीर, सुरेश और अनिरुद्ध सिंह पर निशाना
मेयर ने शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा, शिमला के विधायक सुरेश भारद्वाज और कुसुम्पटी के विधायक अनिरुद्ध सिंह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिमला सहित प्रदेश भर में बिगड़ रही कानून व्यवस्था पर विधानसभा के दौरान सवाल नहीं उठाए गए, लोगों को भ्रमित करने के लिए नगर निगम को बरखास्त करने की मांग जरूर उठाई गई।