हमारी दिनचर्या और खान पान इतना बिगड़ चुका है कि हम रोगों की चपेट में आ गए हैं। लालच, उपेक्षा, अत्याचार और लापरवाही रोग के चार प्रमुख कारण हैं। स्वामी गौरीश्वरानंद पुरी ने बताया कि हम जो रोज भोजन करते हैं वह पूरी तरह से नहीं पचता और धीरे- धीरे हमारे पेट में जमा होता रहता है।
यही भोजन एसिडिटी और दूसरी पेट की बीमारियों का कारण बनता है। स्वामी गौरीश्वरानंद कहते हैं कि कपालभाति और कुजंलक्रिया एसिडिटी, कब्ज और बुखार में रामबाण हैं।
जो लोग कब्ज से परेशान हैं सुबह उठते ही बिस्तर पर पीठ सीधे करके बैठ जाएं। बायीं हथेली नाभि पर रखें और जोर से सांस लेते हुए पेट अंदर करें और फिर छोड़ दें।