मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रसिद्ध साहित्यकार पीयूष गुलेरी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। कांगड़ा जिले से संबंध रखने वाले गुलेरी का शनिवार को निधन हो गया।मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य की दुनिया में गुलेरी का बहुत बड़ा योगदान रहा है और विशेषकर पहाड़ी साहित्य में उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने पहाड़ी, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, पंजाबी, उर्दू इत्यादि विभिन्न भाषाओं में पुस्तकें लिखी हैं। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के सदस्यों को इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने तथा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।
मैं सोचा दा क्या ओआ दा, इक दूजे जो टोआ दा... के रचयिता साहित्यकार डॉ. पीयूष गुुलेरी की पांच मौलिक, छह सह संपादित पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, जबकि एक शोध ग्रंथ सहित करीब 45 शोध पत्र डॉ. पीयूष के नाम हैं। साहित्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें 1972 में राज्य स्तरीय सम्मान (साहित्य अकादमी हिमाचल प्रदेश), हिम हम्मीर, संध्यापुरी, हिमाचल केसरी, फ्रेंड्स यूनिवर्सल अवार्ड, हिंदी-साहित्य सम्मेलन ताशकंद सम्मान, पुरोहित चंद्रशेखर राष्ट्रीय पुरस्कार और यशवंत सिंह परमार के सम्मान से सम्मानित किया गया।
डॉ. पीयूष गुलेरी का जन्म 14 अप्रैल 1940 में कांगड़ा के गुलेर गांव में राजपुरोहित पिता पंडित कीर्तिधर शर्मा गुलेरी और माता सत्यवती गुलेरी के घर में हुआ। पीयूष गुलेरी का असल नाम कृष्ण गोपाल है, जबकि उनके साहित्यिक गुरु सोमनाथ सिंह ने उन्हें पीयूष उपनाम दिया। पीयूष गुलेरी ने राजा हरिश्चंद्र सनातन धर्म हाई स्कूल में दसवीं की परीक्षा वर्ष 1955 में पास की।
वहीं, भूषण, प्रभाकर, बीए, एमए और बीएड पंजाब, जबकि प्रसिद्ध साहित्यकार शिक्षक डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा एवं पद्म सिंह शर्मा के निर्देशन में कुरुक्षेत्र महाविद्यालय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। बचपन के दिनों से ही डॉ. पियूष गुलेरी का साहित्य की ओर रुझान हो गया था। साल 1969 में ‘मेरा देश म्हाचल’ शीर्षक से काव्य-संग्रह प्रकाशित हुआ।
इससे पूर्व वर्ष 1964 से आकाशवाणी जालंधर से जय पर्वत की गूंज कार्यक्रम में नियमित रूप से पियूष की हिमाचली रचनाएं प्रसारित होने लगीं। नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया की ओर से ‘किरनी झुल्लां दी’ शीर्षक से कहानी-संकलन का संपादन भी किया। पीयूष गुलेरी ने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय धर्मशाला, चंद्रधर शर्मा गुलेरी महाविद्यालय और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र धर्मशाला में भी सेवाएं दीं।