हर मेडिकल कॉलेज में रोजाना 200 मरीज पहुंच रहे
प्रदेश के हर मेडिकल कॉलेज में रोजाना 200 मरीज मनोचिकित्सा ओपीडी में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें नए मरीजों की संख्या ज्यादा है, जबकि कुछेक फॉलोअप के मामले भी रहते हैं। इसमें इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एंव अस्पताल में 180 से 200 ओपीडी है। कांगड़ा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में समेत नाहन, चंबा, हमीरपुर और नेरचौक मेडिकल कॉलेजों की मनोचिकित्सा ओपीडी भी इसी तरह से है। इसके अलावा पीजीआई, मोहाली समेत एमएमयू अस्पताल कुमारहट्टी में भी मरीज उपचार के लिए जाते हैं।
बच्चों को मोबाइल की लत, बड़ों को नौकरी और घर की चिंता
शांत वातावरण और सुखद जीवन के लिए पहचाने जाने वाले हिमाचल प्रदेश में भी मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियां बन रहा है। बच्चों में मोबाइल की लत चिंता, घबराहट या बेचैनी (एंग्जायटी डिसऑर्डर) बढ़ा रही है। मोबाइल की लत से पीछा छुड़वाने के लिए बच्चे अस्पताल की ओपीडी में आ रहे हैं। वयस्कों में नौकरी, परिवार व आर्थिक जिम्मेदारियों का दबाव चिंता का कारण बन रहा है।
नशा बन रहा मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का बड़ा कारण
प्रदेश में नशे का बढ़ता चलन चिंता का विषय बना हुआ है। हालात यह है कि 15 आयु वर्ग के कई युवा भी सिंथेटिक नशे की चपेट में आ रहे हैं। नशे का सेवन शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्थिति को भी प्रभावित कर रहा है।
केस स्टडी
आईजीएमसी की मनोचिकित्सा ओपीडी के बाहर बैठी एक युवती को रात में नींद नहीं आती। छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन बढ़ गया है। वह कुछ समय से दवा ले रही है, लेकिन अभी पूरी तरह राहत नहीं मिली है। मोबाइल फोन देखने से परेशान बच्चे ने बताया कि वह रात को जागता था। अब मोबाइल देखने से चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ गया है। गुस्सा तीव्र आता है और चिंता को बढ़ाता है। पढ़ाई में मन तक नहीं लगता है।
विशेषज्ञ राय
आईजीएमसी के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश के अनुसार बदलती जीवनशैली और दिनचर्या का असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। तनाव भी परेशानी बढ़ाने वाला अहम कारक है। कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी भूमिका निभाते हैं। समय पर उपचार न मिलने से समस्या गंभीर हो सकती है। इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आईजीएमसी के सेवानिवृत्त प्राचार्य और मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एलएस पॉल का कहना है कि लोगों के जीवन में तनाव बढ़ रहा है। जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया है। बच्चों में मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल चिंता का विषय है।