हिमाचल में थर्मोकोल से बने कप-प्लेट और डोने पर प्रतिबंध लगा तो उपायुक्त सिरमौर ने उनका विकल्प तलाश लिया। उन्होंने महिलाओं को सिखाया कि कैसे पत्तों से भी नोट कमाए जा सकते हैं। उन्होंने सबसे पहले उन्हें पत्तल उद्योग से जुड़ने को प्रेरित किया। उन्हें मशीनों पर काम करने के लिए प्रशिक्षण दिया। उसके बाद डीआरडीए के वाटरशेड डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत सिरमौर के संगड़ाह, थाना कसोगा और सतौन में पत्तल बनाने की मशीनें लगाने में सहयोग किया।
आज 100 के करीब महिलाएं पत्तल बनाने का रोजगार पा चुकी हैं। अब तक वे लाखों की कमाई कर चुकी हैं। देखादेखी में और महिलाएं भी जुड़ रही हैं। सिरमौर में रोजाना दस हजार से अधिक पत्तलों का उत्पादन होता है। जिला इसमें सूबे में अव्वल है। इसी सोच को पर्यावरण दिवस पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर उपायुक्त सिरमौर ललित जैन को सम्मानित करने जा रहे हैं।
स्मृति चिह्न की जगह देते हैं पौधा
सिरमौर जिले में सरकारी समारोह में सम्मान के रूप में अब मोमेंटो नहीं पौधे दिए जाते हैं। वर्ष 2018 में गणतंत्र दिवस से इसका आगाज किया गया था। तब से अब तक लगभग 20 हजार पौधे विभिन्न स्थानों पर बांटे गए हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों और स्कूलों में भी ऐसे पौधे दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत भी प्रशासन की ओर से बेटी के जन्म पर दी जाने वाली आर्थिक सहायता के साथ एक-एक पौधा दिया जा रहा है। यह पौधा माता-पिता बेटी के नाम पर रोप रहे हैं।