शिमला। राजधानी के गेयटी थियेटर के ललित कला हॉल में चल रही प्रदर्शनी में लकड़ी से बनीं मूर्तियां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। यह मूर्तियां हाथों से बनाई गई हैं जिनमें धार्मिक मूर्तियां विशेष तौर पर लोगों का पसंद आ रही हैं। इनमें आदियोगी यानी भगवान शिव की योगावस्था की मूर्ति, बुद्ध का स्कल्पचर, केदारनाथ मंदिर का स्क्लपचर और लकड़ी पर सुंदर नक्काशी से बनाई मां लक्ष्मी की चरण पादुका शामिल हैं। इन्हें बनाने के लिए देवदार की लकड़ी का इस्तेमाल किया है। इनका मूल्य दस हजार से पचास हजार तक रखा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से आए कारीगर विरेंद्र सिंह ने बताया कि वह हाथों से ही लकड़ी पर कारीगरी करते हैं जिसमें लंबा समय लगता है। उन्होंने बताया कि उन्हें बुद्ध की मूर्ति बनाने में सबसे ज्यादा समय लगा है। यह स्कल्पचर दो महीने से ज्यादा समय में तैयार किया है। इसके साथ सभी स्कल्पचर बनाने में काफी समय लगा है। उन्होंने बताया कि वह अपने काम को पहचान दिलाना चाहते हैं और आगे भी यही काम करना चाहते हैं।