शालिनी अग्निहोत्री - आईपीएस हैं पर वह आज भी बस से सफर करने में सहज महसूस करती हैं। पिता एचआरटीसी में बतौर कंडक्टर तैनात थे और बेटी शालिनी अग्निहोत्री पुलिस ऑफिसर की वर्दी पहनने के लिए दिन-रात एक कर रही थीं। ऊना जिले के अंब के ठठल गांव की शालिनी ने 2013 में जब आईपीएस की परीक्षा पास की तो युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनकर उभर आईं।
धर्मशाला में बतौर एडिशनल एसपी तैनात शालिनी ने न केवल पहले प्रयास में आईपीएस पास किया बल्कि ट्रेनिंग के दौरान देश भर में बेस्ट कैडेट के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। शालिनी के पिता रमेश कुमार एचआरटीसी में बतौर कंडक्टर तैनात रहे। उन्होंने बेटी की उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि शालिनी ने अभावों में रहते हुए भी भारतीय पुलिस की शीर्ष परीक्षा पास कर अपनी प्रतिभा को साबित किया है।
शालिनी ने प्रदेश के युवाओं के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से कॅरिअर गाइडेंस का अभियान शुरू किया है। आईपीएस शालिनी कहती हैं कि पहले लक्ष्य को निर्धारित करो, फिर उसे पाने के लिए जुट जाओ। कुछ भी असंभव नहीं।
महिला उत्थान के लिए लगा दिया जीवन
रतन मंजरी
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मंजरी- किन्नौर जिले के रिब्बा गांव में स्वर्गीय पीएन नेगी के घर 1952 को पैदा हुई रतन मंजरी ने पूरा जीवन महिला उत्थान के लिए लगा दिया। उन्होंने जीवन भर महिलाओं के विकास और उनको पैतृक संपत्ति का अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया और अंत में सफल रही। मंजरी ऐसी महिला है जो हिमाचल में 1987 में पहली बार महिला प्रधान बनीं।
इतना ही नहीं उन्होंने अपने पंचायत प्रधान के कार्यकाल में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए आवाज बुलंद की। मंजरी कहती हैं कि महिलाओं को आरक्षण देना गलत नहीं है। काबिल और पढ़ी लिखी महिलाओं को समाज के विकास के लिए आगे आना चाहिए।
कबड्डी में चमकाया देश का नाम
प्रियंका नेगी
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प्रियंका नेगी - नाहन के शिलाई क्षेत्र की बेटी प्रियंका नेगी साउथ एशियन गेम्स में गोल्ड दिला चुकी हैं। किसान परिवार में जन्मी प्रियंका नेगी आज अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में धमाल मचा रही हैं। परशुराम अवार्डी प्रियंका आज प्रदेश में बेटियों की आदर्श बनी हुई हैं।
ये कबड्डी खिलाड़ी वर्तमान में कुल्लू में सब इंस्पेक्टर पद पर तैनात हैं। प्रियंका के पिता कंवर सिंह नेगी किसान व मां सुनीता नेगी गृहिणी हैं। प्रियंका ने 2006 में स्पोर्ट्स हॉस्टल बिलासपुर में कबड्डी प्रशिक्षण लिया।
प्रियंका तब सुर्खियों में आईं, जब श्रीलंका में साउथ एशियन गेम्स में गोल्ड जीता। पटना में वर्ष 2012 में फर्स्ट वुमन कबड्डी विश्व कप, 2013 में चीन में तृतीय एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। प्रियंका कहती हैं कि कड़ी मेहनत, लगन व माता-पिता के आशीर्वाद से जीवन में असंभव को संभव किया जा सकता है।
सबसे कम उम्र में फतेह किया एवरेस्ट
डिक्की डोलमा
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डिक्की- 10 मई 1993 को दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतेह कर लाहौल स्पीति की एक लड़की रातों-रात सुर्खियों में आ गई। महज 19 साल 35 दिन की उम्र में इस कामयाबी को हासिल कर डिक्की डोलमा एवरेस्ट फतेह करने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला बन गई।
डिक्की डोलमा की इस कामयाबी ने उनके नाम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी एंट्री दिलाई है। फिलहाल डिक्की डोलमा मनाली के समीप अटल बिहारी मांट्रेनिक इंस्टीट्यूट अलेउ में बतौर इंस्ट्रेक्टर तैनात हैं। दो बच्चों की मां डिक्की डोलमा आज भी उतने ही जुनून के साथ भावी पीढ़ी को पर्वतारोहण के गुर सिखा रही हैं।
तेंदुए के जबड़े से भाई को बचा लाई शिल्पा
शिल्पा
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शिल्पा- 27 अक्तूबर 2012 को स्कूल जाते वक्त बिलासपुर के गांव बढौन की बहादुर बेटी शिल्पा छोटे भाई को तेंदुए के जबडे़ से बचा लाई। इस बहादुर बेटी को 24 जनवरी 2014 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बहादुरी पुरस्कार से नवाजा।
शिल्पा की इस बहादुरी के किस्से स्कूल शिक्षा बोर्ड तीसरी कक्षा की ‘गुंजन’ किताब में बच्चों को पढ़ा रहा है। शिल्पा इन दिनों जमा दो कक्षा की वार्षिक परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। शिल्पा कहती है कि बेटियों को बुलंद हौसलों के साथ मुसीबतों का सामना करना चाहिए। मुश्किल घड़ी में घबराएं नहीं बल्कि डटकर सामना करें। जीत तय है।
जज्बे के साथ काम कर पा सकती हैं मुकाम
पूजा ठाकुर
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पूजा - देशभर की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी बिलासपुर के छोटे से गांव स्योहला की पूजा ठाकुर ने कबड्डी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम चमकाया है। कबड्डी स्पर्धा में चार बार देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी पूजा ठाकुर ने हर बार गोल्ड मेडल जीता है। सोलन में आबकारी एवं कराधान विभाग में बतौर निरीक्षक पद पर कार्यरत पूजा कहती हैं कि लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों से आगे हैं।
ईशा- हमीरपुर के जिला परिषद वार्ड गसोता से नवनिर्वाचित 23 वर्षीय जिप सदस्य ईशा ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों से समर्थित धुरंधरों को चुनाव में हराकर जीत हासिल की। हालांकि, परिवार से कोई राजनीति में नहीं है लेकिन मन में समाज सेवा की ललक थी। इसके चलते जिला परिषद के चुनाव मैदान में कूदी और जीत हासिल की।
जिला परिषद सदस्य बनने के बाद वार्ड की 13 पंचायतों के लोगों को ईशा से उम्मीदें हैं। ईशा कहती हैं कि वह गरीबों के लिए कुछ करना चाहती हैं। स्वरोजगार के लिए युवाओं को प्रेरित करना चाहती हैं। महिलाओं को घरेलू हिंसा, उनके अधिकारों और स्वावलंबी बनाने के लिए भी वह प्रेरित करेंगी।
कंगना
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कंगना- अभिनय का लोहा मनवा चुकी बॉलीवुड क्वीन कंगना रणौत का सफर संघर्ष से भरा रहा है। मायानगरी में छाप छोड़ने वाली मंडी के भांबला की कंगना ने शुरुआती दौर में कड़ी मेहनत की और मुकाम हासिल किया। कंगना आज बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्रियों में से एक हैं।
कंगना कहती हैं कि वर्तमान में हर क्षेत्र में महिलाएं कामयाब हैं। सेना, पुलिस, पर्वतारोहण, बिजनेस, खेल समेत अन्य सभी क्षेत्रों में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। जज्बे के साथ काम कर किसी भी मुकाम को महिलाएं हासिल कर सकती हैं। महिलाएं खुद को किसी से कम न आंकें और मेहनत कर मुकाम हासिल करें।
सुषमा- शिमला जिला के सुन्नी के छोटे से बागड़ी गांव की बेटी सुषमा वर्मा ने क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाकर प्रदेश की लड़कियों को नई राह दिखाई। सुषमा प्रदेश की एक मात्र खिलाड़ी हैं, जिन्होंने भारतीय टीम में स्थान पाया है।
सुषमा टीम में विकेट कीपर और दाहिने हाथ की बल्लेबाज हैं। पिता भोपाल सिंह बेटी पर नाज करते हुए कहते हैं कि आज उनकी पहचान सुषमा के माता-पिता के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि सुषमा इन दिनों बैंगलोर में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के प्रशिक्षण कैंप में हिस्सा ले रही हैं।