करीब डेढ़ साल तक शादी का झांसा देकर महिला से संबंध बनाने और उसका शारीरिक शोषण करने के मामले में हिमाचल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर डेढ़ वर्ष तक कथित तौर पर शारीरिक शोषण करने के मामले में आरोपी की जमानत याचिका को सशर्त स्वीकार कर रिहा करने का निर्णय सुनाया है।
आदेश दिए कि प्रार्थी मामले की जांच में पूर्ण सहयोग देगा। किसी भी तरह से जांच को प्रभावित नहीं करेगा। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने जमानत याचिका का निपटारा करते हुए टिप्पणी की कि महिला अपनी इज्जत बचाने को स्वयं भी जिम्मेवार है। पुलिस की ओर से जुटाए गए तथ्यों और दस्तावेजों से साफ है कि गत डेढ़ साल से प्रार्थी और शिकायतकर्ता एक-दूसरे को जानते थे।
शादीशुदा होने के बावजूद बनाए संबंध
कोर्ट के अनुसार उनका संबंध मित्रता से कहीं आगे था। प्रार्थी पर आरोप था कि उसने पीड़िता से शादी का वादा किया और पिछले डेढ़ वर्ष से उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता रहा। प्रार्थी की ओर से दलील दी गई कि शिकायतकर्ता यह जानती थी कि वह शादीशुदा बाल बच्चे वाला है। फिर भी वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाती रही।
पुलिस की ओर से जुटाए गए दस्तावेजों से यह भी साफ है कि प्रार्थी को आरोपी बनाकर शिकायतकर्ता समझौते की एवज में धनराशि हासिल करना चाहती थी। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने अपने निर्णय में कहा कि नैतिक मूल्यों का निर्वहन करना दोनों पक्षों की जिम्मेवारी बनती है।
पुरुष भी न करें महिलाओं का शोषण
वर्तमान मामले में शिकायतकर्ता यह भलीभांति जानती थी कि प्रार्थी शादीशुदा व्यक्ति है। ऐसी स्थिति में उसे प्रार्थी के साथ इस तरह के कृत्य में शामिल होने से खुद को रोकना चाहिए था। बेशक इस तरह के कृत्य में शामिल पुरुष का भी यह नैतिक दायित्व बनता है कि वह महिला का शोषण न करे।
फिर भी महिला को अपने आप को प्रोटेक्ट करना होगा। अदालत ने अभियोजन पक्ष को यह छूट दी कि यदि प्रार्थी जमानत याचिका स्वीकार करते समय लगाई गई शर्तों की अनुपालना नहीं करता है तो जमानत रद्द करने के लिए आवेदन दायर किया जा सकता है।