मशहूर गांधीवादी अन्ना हजारे दिल्ली के बाद अब हिमाचल में भूमिहीनों के लिए आंदोलन करेंगे। अन्ना राज्य वन विभाग को गई किसानों की भूमि को वापस करने का मामला उठाएंगे। इसके लिए वह शिमला से आंदोलन की शुरुआत कर सकते हैं।
पहले ग्राम पंचायतों की ओर से किसानों को जमीनें दी गई थीं। बाद में ये वापस लेकर राज्य वन विभाग के नाम कर दी गई थीं। स्वयंसेवी संस्था इनक्रे डिबल हिमाचल ने अन्ना हजारे के समक्ष यह प्रस्ताव रखा है कि हिमाचल में बड़ी संख्या में किसान भूमिहीन हो गए हैं।
पहले ग्राम पंचायतों की ओर से ऐसे किसानों को उनके निजी इस्तेमाल के लिए भूमि दी गई थी, मगर अब ये सारी जमीनें राज्य वन विभाग के पास है। सालों पहले प्रदेश में लाए गए एक कानून के कारण हिमाचल में लाखों किसान भूमिहीन हो गए हैं।
हिमाचल के किसानों को मिलेगा उनका हक
इस मामले को हिमाचल में प्रमुखता से उठाने की जरूरत है। अन्ना से मिले प्रतिनिधिमंडल में शामिल स्वयंसेवी संस्था इनक्रेडिबल हिमाचल के प्रदेशाध्यक्ष एवं नेशनल यूथ अवार्डी हेमराज चौहान ने कहा है कि इस मामले को अन्ना हजारे के समक्ष गंभीरता से विचार विमर्श किया गया है।
अन्ना हजारे ने उन्हें कहा है कि हिमाचल के किसानों को उनका हक दिलाया जाएगा। इसके लिए हिमाचल में वह आंदोलन करेंगे। चौहान ने कहा कि मार्च महीने में अन्ना हजारे से फिर मुलाकात की जाएगी और उनका हिमाचल आने का कार्यक्रम तय किया जाएगा।
इस स्वयंसेवी संस्था के प्रतिनिधियों के अलावा हिमाचल से एक विशेष प्रतिनिधिमंडल रालेगन सिद्धि में अन्ना हजारे से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने इस विषय पर हिमाचल से जुड़े विभिन्न मसलों पर चर्चा की।
भू-अधिग्रहण अध्यादेश पर भी करेंगे आंदोलन
इस मौके पर अन्ना हजारे ने प्रतिनिधिमंडल को यह भी बताया कि भू अधिग्रहण पर लाए गए मोदी सरकार के अध्यादेश के खिलाफ वह नई दिल्ली से आंदोलन करने जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह सही नहीं है। अन्ना हजारे ने बताया कि हिमाचल में भूमिहीन किसानों का मसला भी इसी विषय से मिलता-जुलता है, इसलिए इस पर अलग आंदोलन करेंगे।
अन्ना हजारे के इस आंदोलन से मोदी सरकार की मुश्किलें भी आने वाले दिनों में बढ़ने वाली है। उल्लेखनीय है कि भू अधिग्रहण पर लाए गए अध्यादेश को लेकर भाजपा सरकार को काफी समय से किरकिरी का सामना करना पड़ रहा है।
अन्ना हजारे द्वारा किसानों के हक में आंदोलन करने के फैसले से प्रदेश के किसानों में जमीन वापिस मिलने की उम्मीद जाग गई है। किसानों में इसको लेकर काफी उम्मीद जाग गई है।