नगर निगम ने सोलर लाइटों से माल रोड को तो रोशन कर दिया पर लक्कड़ बाजार और आईजीएमसी रोड पर अंधेरा पसरा हुआ है। इस रास्ते पर सोलर लाइट तो दूर, स्ट्रीट लाइटों की भी सुध नहीं ली जा रही।
हिमलैंड बस स्टॉप, टॉलैंड जाने वाले मार्ग और कुफ्टाधार में लंबे अरसे से नए प्वाइंट लगाने की मांग की जा रही है मगर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
पच्चीस वार्डों में लगी करीब 7200 स्ट्रीट लाइटों की देखरेख का जिम्मा बिजली बोर्ड के पास है। लाइटों की मरम्मत और रखरखाव पर प्रति माह बिजली बोर्ड को नगर निगम करीब तीन लाख देता है।
12 लाख का खर्च, फिर भी बेबस जनता
बिजली की मासिक खपत का खर्च करीब बारह लाख है। इतना खर्च करने के बावजूद भी शहर में लगी अधिकांश स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। स्ट्रीट लाइटों में छोटी सी खराबी भी एक से दो माह बाद दुरुस्त हो पाती है। स्ट्रीट लाइटों के नए प्वाइंट लगाने की मांग पर एमसी के अफसर बजट की कमी बताते हैं।
खराब लाइटों को लेकर निगम प्रशासन शिकायत मिलने के इंतजार में रहता है। अधिकारी खुद कभी भी वार्डों का दौरा कर स्थिति की जानकारी नहीं जुटाते। नगर निगम के सहायक आयुक्त नरेश ठाकुर का कहना है कि बजट की उपलब्धता के मुताबिक स्ट्रीट लाइटों के नए प्वाइंट लगाए जा रहे हैं।
खराब स्ट्रीट लाइटों की सूचना मिलते ही उन्हें बिजली बोर्ड के अधिकारियों के ध्यान में लाकर ठीक करवाया जाता है। भराड़ी, रुलदूभट्टा, कैथू, समरहिल, टुटू, बालूगंज, टूटीकंडी, फागली, कृष्णानगर, जाखू, ढली, कनलोग, चम्याणा, मल्याणा, कसुम्पटी,, संजौली, छोटा शिमला, पटयोग और खलीणी वार्ड के लोगों को खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।